नासिक YCMOU में वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे पर राष्ट्रीय परिषद का शुभारंभ, विशेषज्ञों की भागीदारी

World Down Syndrome Day 2026: नासिक के YCMOU में वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में समावेशी समाज और प्रभावित बच्चों के समर्थन पर जोर दिया गया।
Launch of National Council at Nashik YCMOU on World Down Syndrome Day; Participation of Experts
Nashik Down Syndrome Awareness ( Source: Social Media )
Published on: 
Updated on: 

Nashik Down Syndrome Awareness: नासिक 'वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे-2026' के उपलक्ष्य में शनिवार को यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विश्वविद्यालय (YCMOU) में डाउन सिंड्रोम विषय पर 2 दिवसीय राष्ट्रीय परिषद का उत्साहपूर्वक उद्घाटन किया गया।

मुक्त विश्वविद्यालय, डाउन सिंड्रोम केयर एसोसिएशन और इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस परिषद में नासिक की महापौर सौ. हिमगौरी आहेर-आडके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।

अभिभावकों का धैर्य और सामाजिक जिम्मेदारी: उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महापौर हिमगौरी आहेर-आडके ने कहा कि डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों का पालन-पोषण करना धैर्य का काम है।

अभिभावकों को इन बच्चों को अपनी संपत्ति मानना चाहिए, उन्होंने विश्वास दिलाया कि नासिक मनपा समावेशी नीति अपना रही है और इन बच्चों, उनके अभिभावकों तथा संबंधित संस्थाओं के लिए आगामी समय में ठोस कार्य योजना लागू की जाएगी।

स्वास्थ्य जांच शिविर के साथ विविध कार्यक्रमों का आयोजन

उद्घाटन सत्र के बाद स्वास्थ्य जांच शिविर, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, अभिभावक-संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया इस अवसर पर सराहनीय उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों और उनके माता-पिता को सम्मानित भी किया गया। इस राष्ट्रीय परिषद में कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और पुणे जैसे शहरों से बड़ी संख्या में डॉक्टर, विशेषज्ञ, स्वयंसेवका और अभिभावक हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नमिता चोपडे और डॉ. संगीता पाटील ने किया।

विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर डाला प्रकाश

परिषद में विशेषज्ञों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। डॉ. ज्ञानदेव चोपडे ने कहा कि डाउन सिंड्रोम के बारे में जानकारी तो बहुत है, लेकिन वास्तविक आवश्यकता इन बच्चों के साथ संवाद करने और उन्हें समझने की है।

प्रो. संजीवनी महाले ने घोषणा की कि मुक्त विश्वविद्यालय जल्द ही इन विशेष बच्चों के लिए नए पाठ्यक्रम शुरू करेगा, डॉ. हेमा पुरंदरे ने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए परिवार, चिकित्सा क्षेत्र और समाज के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. अरुण गचाले ने कहा कि इन बच्चों में केवल एक अतिरिक्त गुणसूत्र ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त साहस भी होता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com