गोंदिया से खत्म हो जाएगा डेयरी व्यवसाय? चारे की कमी से तंग आकर कौड़ियों के दाम पर मवेशी बेच रहे किसान

Gondia Fodder Crisis: गोंदिया में पशुधन पर संकट! चारे और पानी की कमी से 2 साल में आधे रह गए पालतू जानवर। बाजारों में मवेशियों को बेचने के लिए उमड़ी भीड़।
Massive fodder and water crisis in Gondia district. Livestock count drops from 5.83 lakh to 2.80 lakh.
मवेशियों के लिए चारे की समस्या (सौजन्य-नवभारत)
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Livestock Decline Maharashtra: इस समय पशुपालकों को चारे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ तो प्रशासन का कहना है कि जिले में चारे की कोई कमी नहीं है लेकिन, पशुपालक चारे की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में परेशान पशुपालक अपने पशुओं को बेचने के लिए बाहर ले जा रहे हैं। इस वजह से जिले के बाजारों में पशुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। ज्यादातर किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं।

पशु डेयरी फार्मिंग, बकरी पालन, मुर्गी पालन, डेयरी फार्मिंग आदि के लिए पाले जाते हैं। कुछ लोग व्यवसाय के लिए पशु पालते हैं। लेकिन अब पशुपालन का पूरक व्यवसाय पशुपालकों के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। गर्मी के बीच में पशुओं पालन पोषण कैसे करें, यह सवाल उठता है।

दूसरी ओर, खरीफ और रबी सीजन में धान की फसल तो होती है, लेकिन पशुपालकों को चारे की कमी का सामना करना पड़ता है। गर्मी के बीच में सूखा चारा भी पशुपालकों को कम मात्रा में मिल पाता है। वहीं ऐसे मौसम में हरा चारा नहीं मिलता। पानी की कमी के कारण पशुपालक हरा चारा नहीं उगा पाते, जिससे उनके लिए अपने जानवरों को पालना मुश्किल हो जाता है।

जानवरों के लिए पानी की पूर्ति करने की मांग

जिले के पशुपालक अपने जानवरों को पालने और चारे को लेकर बहुत परेशान हो गए हैं। इस वजह से पशुपालक बड़ी मात्रा में जानवरों को बेचने के लिए बाजार ले जा रहे हैं। जिले के बाजारों में बिक्री के लिए आने वाले जानवरों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है। इस वजह से डेयरी व्यवसाय में भी दिक्कतें आने की संभावना है। जानवरों के लिए पानी पूर्ति की जरूरत है। गांव के तालाब, नदी, नाले और बांध सूख गए हैं। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए पशुपालक जिला प्रशासन से जानवरों के लिए पानी की पूर्ति करने की मांग कर रहे हैं।

पिछला आधिकारिक कुल - 5.83

वर्तमान पशुधन - 2.80

एक साल से कम के बछड़े-बछियां - 62,117

दैनिक चारे की आवश्यकता(मीट्रिक टन) - 2,452

चारे के बीज बांटे जा रहे

जिले में पशुपालकों को गर्मियों में चारे की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए चारे के बीज बांटे जा रहे हैं। जिले के कुछ तहसील में चारे के बीज बांटे जा चुके हैं और बीज बांटने का काम चल रहा है। पशुपालकों को चारे की कमी का सामना न करना पड़े इसके लिए पशु संवर्धन विभाग कटिबध्द है।

- डॉ. जालिंदर टिटम, उपायुक्त, जिला पशु संवर्धन विभाग, गोंदिया।

जिले में पशुपालन घटा

दो साल पहले, जिले में 6 लाख पालतू जानवर थे। बकरियां और भेड़ें भी पालते हैं। जिले में गाय-भैंसों की संख्या 3,60,529 और बकरियों और भेड़ों की संख्या 1,58,145 है। इसी तरह, एक साल से कम उम्र के बछड़ों और बछियों की संख्या 62,117 है। इस तरह, जिले में 5,83,791 पालतू जानवर थे। इस साल जानवरों की संख्या कम हुई है और यह आंकड़ा सिर्फ 2.80 लाख है, यह जानकारी जिला पशुसंवर्धन उप आयुक्त डॉ. जालिंदर टिटम ने दी। जिले में जानवरों के लिए हर दिन 2,452 मीट्रिक टन चारे की जरूरत होती है।

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