Nashik Smart City Project Failure( Source: Social Media )
Nashik Smart City Project Failure: नासिक शहर के बांधों में पर्याप्त जलसंग्रह होने के बावजूद नासिकवासियों को भीषण पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। वितरण व्यवस्था की खामियों और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की लापरवाही के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। पिछले 2 दिनों से मरम्मत कार्य के नाम पर पानी की आपूर्ति बंद रखे जाने से जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
करोड़ों की योजना अधूरी और सफेद हाथी साबित स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत नासिक के गावठाण क्षेत्रों में 24 घंटे पानी आपूर्ति योजना की घोषणा की गई थी।
इस योजना की कुल लागत लगभग 1100 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र व राज्य सरकार का 850 करोड़ और महानगरपालिका का 250 करोड़ रुपये का हिस्सा शामिल है।
यह परियोजना वर्ष 2022 तक पूरी होनी थी, लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है। योजना के तहत 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई और 6 जलकुंभ बनाए गए, लेकिन करोड़ों खर्च होने के बाद भी ये जलकुंभ आज खाली पड़े हैं।
स्मार्ट सिटी के नाम पर पुरानी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन नई प्रणाली समय पर शुरू नहीं हो सकी।
पंचवटी और बारा बंगला क्षेत्र के 27 एमएलडी क्षमता वाले जलशुद्धिकरण केंद्र को अपग्रेड करने के लिए तोड़ दिया गया, जिससे आपूर्ति बाधित हुई।
नासिकरोड़ के चेहड़ी क्षेत्र से आने वाले पानी में ड्रेनेज मिश्रित होने के कारण उसे उठाना बंद कर दिया गया है। इससे रोजाना लगभग 52 एमएलडी पानी की कमी हो रही है।
24 घंटे पानी देने का वादा करने वाली योजना अब नागरिकों को एक वक्त का पानी देने में भी नाकाम साबित हो रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधाकर बडगुजर ने महानगरपालिका की महासभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है- बडगुजर ने परियोजना की गुणवत्ता और देरी के कारणों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लाभ न मिलने से नागरिकों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आगामी दिनों में यदि जलापूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना है। प्रशासन की विफलता के कारण यानी होते हुए भी नासिक प्यासा रहने को मजबूर है।
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कुल बजटः 1100 करोड़ रुपये, अधूरी।
पाइपलाइन: 18 किलोमीटर।
खाली जलकुंभः 6।
दैनिक पानी की कमी: 52 एमएलडी (चेहड़ी और अन्य कारणों से)।
अपेक्षित पूर्णता वर्ष 2022 (वर्तमान में 4 साल पीछे)