

Nashik Industrial Development: नासिक के औद्योगिक विकास का आधार स्तंभ कहा जाने वाला अंबड औद्योगिक क्षेत्र आज प्रशासन की घोर उपेक्षा और भ्रष्टाचार के 'गड्डों' में फंसकर रह गया है। नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बड़े-बड़े दावों के बावजूद यहां की सड़कों की हालत 'खेलखंडोबा' (पूरी तरह बर्बाद) हो चुकी है, जिससे उद्यमियों और श्रमिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
कुछ समय पूर्व मनपा आयुक्त मनीषा खत्री ने अंबड एमआईडीसी का प्रत्यक्ष दौरा किया था। बदहाल सड़कों को देखकर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को 'तत्काल' मरम्मत के कड़े निर्देश दिए थे।
इसके बाद महापौर हिमगौरी आडके ने भी सड़कों के कायाकल्प और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। हकीकत यह है कि हफ्तों बीत जाने के बाद भी धरातल पर काम का एक पत्थर तक नहीं हिला है।
प्रशासन की यह सुस्ती नासिक के उद्योगों को गर्त में धकेल रही है। अंबड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (आयमा) के पदाधिकारी लगातार मनपा कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
आयमा के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर गोपाले ने प्रशासन की कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल किए है- शहर का आर्थिक आधार समझे जाने वाले क्षेत्र के प्रति नगर निगम इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है? औद्योगिक क्षेत्रों से करोड़ों रुपये का भारी-भरकम टैक्स वसूलने वाला निगम बजट की कमी का रोना कब तक रोएगा? सड़कों पर बने ये जानलेवा गड्ढे न केवल माल दुलाई में बाधा है, बल्कि यहां काम करने वाले हजारों श्रमिकों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बने हुए है।
उद्यमियों को उम्मीद थी कि नई सत्ता आने के बाद हालात सुधरेंगे, लेकिन उनका यह भ्रम अब पूरी तरह टूट चुका है- क्या निचले स्तर के अधिकारी आयुक्त के आदेशों को अनसुना कर रहे है? गड्डी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और करोड़ों के औद्योगिक नुकसान की जिम्मेदारी क्या नगर निगम प्रशासन लेने को तैयार है?