20 जुलाई 2027 से शुरू होगा सिंहस्थ कुंभ, 31OCT को सिर्फ श्रीगणेश; सोशल मीडिया पर न करें यकीन! जानिए असली कुंभ

Kumbh Mela 2027 Schedule: नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 20 जुलाई से 12 सितंबर 2027 तक होगा। 24 जुलाई को वैष्णव अखाड़ों में ध्वजारोहण और 29 जुलाई को पेशवाई प्रस्तावित है।
Nashik Trimbakeshwar Singhastha Kumbh Mela 2027 Dates
नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 20 जुलाई से 12 सितंबर 2027 तक आयोजित होगा।

  • 31 अक्टूबर के धर्म ध्वजारोहण को कुंभ का वास्तविक शुभारंभ नहीं माना जाएगा।

  • 24 जुलाई 2027 को नाशिक के तीन वैष्णव अनी अखाड़ों में धर्म ध्वजा फहराई जाएगी।

  • 29 जुलाई को वैष्णव अखाड़ों की पेशवाई प्रस्तावित है।

  • 2 अगस्त से कथा, प्रवचन, यज्ञ और हवन जैसी धार्मिक गतिविधियां शुरू होंगी।

  • त्र्यंबकेश्वर के 10 संन्यासी अखाड़ों की ध्वजारोहण और पेशवाई की तारीखें अभी तय होना बाकी हैं।

Nashik Trimbakeshwar Singhastha Kumbh Mela 2027 Dates: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन 20 जुलाई से 12 सितंबर 2027 तक होगा। 31 अक्टूबर 2026 को हुआ धर्म ध्वजारोहण कुंभ का धार्मिक श्रीगणेश है, वास्तविक मेले की शुरुआत नहीं। नासिक में 24 जुलाई 2027 को तीन वैष्णव अखाड़ों में धर्म ध्वजा फहराई जाएगी और 29 जुलाई को पेशवाई होगी। 2 अगस्त से कथा, प्रवचन, यज्ञ और हवन जैसी गतिविधियां शुरू होने की जानकारी दी गई है। त्र्यंबकेश्वर के संन्यासी अखाड़ों की तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं।

धर्म ध्वजा और पेशवाई से शुरू होंगी कुंभ की धार्मिक गतिविधियां

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 31 अक्टूबर को राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में धर्म ध्वजारोहण संपन्न होने के बाद सोशल मीडिया पर सिंहस्थ कुंभ मेला शुरू होने की खबरें वायरल हो रही हैं। हालांकि, यह कुंभ पर्व का धार्मिक श्रीगणेश है, वास्तविक मेले का शुभारंभ नहीं। नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का आयोजन 20 जुलाई से 12 सितंबर 2027 तक होगा। इस दौरान अखाड़ों में धर्म ध्वजा स्थापना, पेशवाई और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कुंभ की गतिविधियां गति पकड़ेंगी।

धर्म ध्वजारोहण से शुरू होती है अखाड़ों की परंपरा

कुंभ मेले का वास्तविक धार्मिक स्वरूप तब सामने आता है, जब देशभर से साधु-संत, तपस्वी, बैरागी और संन्यासी एकत्र होते हैं। इसके बाद कथा, प्रवचन, यज्ञ, हवन और भंडारों का आयोजन शुरू होता है। अखाड़ों में धर्म ध्वजा की स्थापना को इस धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद अखाड़े अपनी परंपरा और वैभव के अनुसार पेशवाई निकालते हैं।

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24 जुलाई को वैष्णव अखाड़ों में ध्वजारोहण

नासिक-त्र्यंबकेश्वर महाकुंभ दो प्रमुख हिस्सों में आयोजित होता है। नासिक में वैष्णव संप्रदाय के तीन अनी अखाड़ों की छावनियां लगती हैं। तीनों अखाड़ों के राष्ट्रीय प्रवक्ता भक्ति दास महाराज के अनुसार, 24 जुलाई 2027 को सबसे पहले दिगंबर अखाड़े में धर्म ध्वजा स्थापित की जाएगी। इसके बाद निर्मोही और निर्वाणी अखाड़े में ध्वजारोहण होगा।

इन अखाड़ों की पेशवाई 29 जुलाई को प्रस्तावित है। पेशवाई के साथ अखाड़ों का विधिवत संचालन शुरू होता है। इसके बाद साधु-संतों की धार्मिक गतिविधियां और आयोजन तेज होंगे।

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2 अगस्त से धार्मिक अनुष्ठानों का दौर

कुंभ मेले के दौरान कथा, प्रवचन, यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का विशेष महत्व होता है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, 2 अगस्त 2027 से इन गतिविधियों की शुरुआत होगी। प्रशासन के सामने सबसे पहली प्राथमिकता देशभर से आने वाले साधु-संतों को उनके अखाड़ों के लिए भूखंड उपलब्ध कराना है। इसके बाद संत अपने-अपने भूखंडों पर पंडाल बनाकर धार्मिक कार्यक्रम शुरू करेंगे।

त्र्यंबकेश्वर के अखाड़ों की तारीखें बाकी

त्र्यंबकेश्वर में स्थित 10 संन्यासी अखाड़ों के धर्म ध्वजारोहण और पेशवाई की अंतिम तारीखों पर अभी निर्णय होना बाकी है। यहां परंपरा के अनुसार कुछ अखाड़े समूह में धर्म ध्वजारोहण करते हैं।

जूना, आह्वान, अग्नि और किन्नर अखाड़ा एक साथ धर्म ध्वजा फहराते हैं। निरंजनी और आनंद अखाड़े का ध्वजारोहण भी संयुक्त रूप से होता है। महानिर्वाणी और अटल अखाड़ा एक साथ ध्वजा स्थापित करते हैं। वहीं, बड़ा उदासीन, नया उदासीन और निर्मल अखाड़ा उदासीन परंपरा के तहत सामूहिक ध्वजारोहण करते हैं।

हालांकि, धर्म ध्वजारोहण समूह में होने के बावजूद प्रत्येक अखाड़े की पेशवाई अलग-अलग होती है। इसकी अंतिम तारीखें तय होने के बाद कुंभ के कार्यक्रम का विस्तृत स्वरूप स्पष्ट होगा।