

Nashik Simhastha Kumbh Flag Hoisting: आगामी सिंहस्थ कुंभमेले के शुभारंभ को लेकर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। महाआरती में करीब 5 हजार श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था होगी, जबकि यातायात, पार्किंग और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के शुभारंभ के अवसर पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले ध्वजारोहण समारोह को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह ने तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
ध्वजारोहण के बाद शाम को होने वाली महाआरती में करीब 5 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की व्यवस्था की जाएगी। अन्य श्रद्धालुओं के लिए कार्यक्रम स्थल पर बड़े स्क्रीन लगाए जाएंगे।
ध्वजारोहण समारोह के मार्गों का अंतिम नियोजन पुलिस प्रशासन, मनपा, त्र्यंबकेश्वर प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वय से किया जा रहा है। भीड़ को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थलों के आसपास पार्किंग व्यवस्था, पार्किंग स्थल से कार्यक्रम स्थल तक पैदल मार्ग और यातायात नियमन की योजना तैयार की जा रही है।
प्रशासन का प्रयास है कि धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो और श्रद्धालुओं को आने-जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
ध्वजारोहण समारोह के अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान कुंभ मेले की वेबसाइट का शुभारंभ, भारतीय डाक विभाग के दो विशेष डाक टिकटों का अनावरण और कॉफी टेबल बुक का प्रकाशन किया जाएगा।
सिंहस्थ कुंभ मेले की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले कुंभ गीत का निर्माण भी किया जा रहा है। गीत में शामिल ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों की सटीकता की जांच के लिए विशेषज्ञों की समिति काम कर रही है।
रामकुंड और आसपास के विरासत स्थलों के संरक्षण के साथ श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। घाट क्षेत्र में पत्थर का काम, सीढ़ियां, नालियां और अन्य आवश्यक कार्यों की समीक्षा की गई है।
नासिक और त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए कुंभ की धार्मिक प्रक्रियाओं में किसी प्रकार का व्यवधान न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
सिंहस्थ कुंभ की पृष्ठभूमि में सप्तशृंगगढ़ में स्वच्छता, शौचालय, कचरा प्रबंधन, पार्किंग, शटल बस सेवा, पुलिस बंदोबस्त और आपदा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संभावित चट्टान गिरने के खतरे को देखते हुए एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं।
वणी, नांदुरी और सप्तशृंगगढ़ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय पदाधिकारियों के सुझावों को भी नियोजन में शामिल किया जाएगा।
संभावित श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए पेयजल उपलब्धता और अतिरिक्त जल भंडारण की समीक्षा की जाएगी। परिस्थितियों के अनुसार जल प्रबंधन योजना को अपडेट किया जाएगा, ताकि पानी का उचित और मितव्ययी उपयोग सुनिश्चित हो सके।