किताबों के साथ खेती भी: नासिक में 'बाल किसानों' का कमाल, आदिवासी छात्रों ने की जैविक खेती

Nashik Tribal Students Farming: नासिक में आदिवासी आश्रम शाला के छात्रों ने 'संपदा' परियोजना के तहत एक एकड़ जमीन पर जैविक खेती कर मिसाल पेश की। प्रदर्शनी में उनकी उगाई सब्जियां एक घंटे में बिक गईं।
Farming Alongside Books: The Feat of 'Child Farmers' in Nashik—Tribal Students Engage in Organic Farming
Nashik Student Agriculture Initiative ( Source: Social Media )
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Nashik Student Agriculture Initiative: नासिक जिस उम्र में बच्चे केवल किताबों को दुनिया में रमे होते हैं, उसी उम्र में आदिवासी आश्रम शाला के छात्रों ने मिट्टी से नाता जोड़कर जैविक खेती की एक नई इबारत लिखी है।

आदिवासी विकास विभाग की 'संपदा' परियोजना के माध्यम से, 9वीं कक्षा के इन 'बाल किसानों' ने एक एकड़ बंजर भूमि पर विषमुक्त खेती लहलहा कर सबको हैरान कर दिया है।

छात्रों के कठिन परिश्रम से उपजी इस 'जैविक संपदा' की प्रदर्शनी नासिक के आदिवासी विकास भवन में लगाई गई। आदिवासी विकास आयुक्त लीना बनसोड के हाथों इस 'कृषि उत्पाद बाजार विकास एवं विक्री अनुभव' उपक्रम का उद्घाटन हुआ।

प्रदर्शनी शुरू होते हो अधिकारियों, कर्मचारियों और नासिक वासियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ताजी और शुद्ध सब्जियां इतनी पसंद की गई कि महज 1 घंटे के भीतर सारा स्टॉक बिक गया।

सटाणा तहसील की दहिंदुले आश्रम शाला, कलवण की चणकापुर, कनाशी व मोहनदरी और सुरगाणा तहसील की पलसन आश्रम शाला के छात्रों और शिक्षकों ने इस जैविक माल का उत्पादन किया।

'बाल वैज्ञानिकों' ने साझा किए अनुभव

छात्रों ने आगंतुकों को केवल सब्जियां ही नहीं बेचीं, बल्कि खेती के तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी। छात्रों ने मिट्टी परीक्षण के महत्व और उससे होने वाले लाभों के बारे में बताया, बच्चों ने उत्पादन लागत और मुनाफे के गणित को बखूबी समझाया। आयुक्त लीना बनसोड के साथ संवाद के दौरान बच्चों ने बताया कि कैसे उन्होंने रासायनिक उर्वरकों और दवाओं के इस्तेमाल से बचकर शुद्ध सब्जियां उगाई। बच्चों के जमीनी अनुभवों को सुनकर वरिष्ठ अधिकारी दंग रह गए।

राहीबाई पोपरे के गांव का दौरा

प्रशासन ने इस सफलता को देखते हुए आगे की रूपरेखा तैयार की है। भविष्य में इन छात्रों को बीजमाता राहीबाई पोपरे के गांव का दौरा कराया जाएगा ताकि वै पारंपरिक बीजों के संरक्षण को समझ सके। इस सफल 'संपदा' परियोजना को अन्य आश्रम शालाओं में भी लागू किया जाएगा,

छात्रों को जैविक खेती की पद्धति समझ आए और वे स्वयं अपने उत्पाद बेचने का अनुभव ले सकें, इसी उद्देश्य से यह उपक्रम शुरू किया गया है, बच्चों की सफलता देख आज बहुत खुशी हो रही है।

-आदिवासी विकास विभाग, आयुक्त, लीना बनसोड

संपदा उपक्रम के कारण मुझे जैविक और ससायनिक खेती के बीच का अंतर समझ आया। इस परियोजना ने हमें सिखाया कि घर पर भी शुद्ध सब्जियां उगाना संभव है।

-छात्रा, चेतना भोये

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