

VIP सुरक्षा के चलते दिनभर रामकुंड और गोदाघाट जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग रही।
स्थानीय नागरिकों ने आम लोगों के लिए अलग दर्शन व्यवस्था नहीं होने पर नाराजगी जताई।
अतिथियों के काफिले निकलने के बाद नागरिकों ने खुद बैरिकेड हटाकर रामकुंड में प्रवेश किया।
भीड़ बढ़ने से कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बनने का खतरा पैदा हुआ।
1 नवंबर को श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य की उपस्थिति में ध्वजदंड प्राण-प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ।
Nashik Kumbh Mela VIP Movement Controversy Ramkund Barricades: नासिक में 31 अक्टूबर को सिंहस्थ कुंभ के ध्वजारोहण और महागोदा आरती समारोह के दौरान VIP मेहमानों को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय नागरिकों में नाराजगी रही। शाम को अतिथियों के काफिले रवाना होने के बाद लोगों ने खुद बैरिकेड हटाकर रामकुंड में प्रवेश किया। भीड़ बढ़ने से कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बनने का खतरा पैदा हुआ, जिसे पुलिस ने नियंत्रित किया। इसी बीच गंगा गोदावरी मंदिर में ध्वजदंड प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 1 नवंबर को श्रृंगेरी शंकराचार्य की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
नासिक, सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण और महागोदा आरती समारोह में VIP मेहमानों को प्राथमिकता दिए जाने से आम नासिक वासियों की नाराजगी 31 अक्टूबर को दिनभर बढ़ती रही। राष्ट्रपति और अन्य गणमान्य अतिथियों की सुरक्षा के लिए रामकुंड और गोदाघाट की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर प्रवेश सीमित रखा गया था। इससे पंचवटी, पुराने नासिक और गोदावरी तट के निवासियों को अपने घरों तक पहुंचने में भी परेशानी हुई।
सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए नागरिकों ने आम लोगों के लिए अलग दर्शन व्यवस्था और स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा कि यह समारोह पूरे नासिक का है या केवल चुनिंदा अतिथियों के लिए?
शाम की गोदा आरती के समय भी प्रवेश पर प्रतिबंध जारी रहने से नागरिकों का धैर्य जवाब देने लगा। शाम करीब साढ़े सात बजे अतिथियों के काफिले गोदाघाट से रवाना हुए तो स्थानीय नागरिकों ने लोहे और लकड़ी के बैरिकेड हटाकर रामकुंड की ओर जाना शुरू कर दिया।
मालेगांव स्टैंड और सरदार चौक पर भी बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। देर रात तक रोशनी से जगमगाते गोदावरी तट पर नासिक वासियों की भीड़ और उत्साह दिखाई दिया। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने परिसर में घूमकर तस्वीरें और वीडियो बनाए।
एक ही समय में हजारों लोगों के ढलान की ओर गोदाघाट की तरफ बढ़ने से कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बनने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। हालांकि, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए भीड़ को नियंत्रित कर लिया।
इस घटनाक्रम ने सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी और भीड़ प्रबंधन के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को सामने रखा है। वर्ष 2003 के सिंहस्थ हादसे की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आगामी आयोजनों में पुलिस और प्रशासन को अधिक सटीक नियोजन करना होगा।
दूसरी ओर, गंगा गोदावरी मंदिर में पिछले तीन दिनों से चल रहे ध्वजदंड प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का समापन रविवार, 1 नवंबर को हुआ। इस अवसर पर श्रीमद् परिव्राजकाचार्य एवं श्रृंगेरी पीठाधीश्वर श्री श्री विधुशेखर भारती तीर्थ स्वामी उपस्थित रहे।
स्वामीजी के करकमलों से समारोह की पूर्णाहुति की गई। उन्होंने प्राचीन गोदावरी मंदिर में दर्शन किए और होम-हवन तथा देवता पूजन संपन्न कराया।
प्रमुख आचार्य कल्पेश दीक्षित, वैभव दीक्षित, सतीश शुक्ल, चंद्रशेखर पंचाक्षरी, प्रतीक शुक्ल, शेखर शुक्ल, दिनेश गायधनी, भालचंद्रशास्त्री शौचे, शांताराम शास्त्री भानोसे, वैभव बेळे, शाम नाचन और प्रफुल्ल गायधनी सहित पुरोहितों ने वेदोक्त मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक विधियां संपन्न कराईं।
इस दौरान होम-हवन, पुण्याहवाचन, कलश पूजन, नवग्रह पूजन, स्थापित देवता पूजन और क्षेत्रपाल पूजन जैसे अनुष्ठान किए गए।