

एमपीसीबी की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में गोदावरी के तीन स्थानों पर घुलित ऑक्सीजन शून्य मिली।
तपोवन के कपिला संगम पर बीओडी 85 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज।
दसक परिसर में बीओडी 52 और समता नगर (टाकली) में 17 मिलीग्राम प्रति लीटर रही।
पानी का रंग मटमैला-भूरा और तेज दुर्गंध होने का उल्लेख।
पर्यावरण प्रेमियों ने नदी पुनर्जीवन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना की मांग की।
Nashik Godavari River Pollution MPCB Report Zero Oxygen: एमपीसीबी की अक्टूबर 2026 की जल परीक्षण रिपोर्ट में गोदावरी नदी के तपोवन, दसक और समता नगर के नमूनों में घुलित ऑक्सीजन का स्तर शून्य मिला है। तपोवन के कपिला संगम पर बीओडी 85 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज होने से नदी के प्रदूषण और आगामी हरित कुंभ की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नासिक, आगामी सिंहस्थ कुंभ से पहले गोदावरी नदी की स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) की अक्टूबर 2026 की जल परीक्षण रिपोर्ट में नदी के तीन प्रमुख स्थानों पर घुलित ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर शून्य दर्ज किया गया है। यह स्थिति नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और जलीय जीवन के लिए चिंता का विषय है। रिपोर्ट में तपोवन के कपिला संगम पर जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 85 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है।
एमपीसीबी की नासिक क्षेत्रीय प्रयोगशाला ने 5 अक्टूबर 2026 को गोदावरी नदी के अलग-अलग हिस्सों से पानी के नमूने एकत्र किए थे। जांच में तपोवन, दसक परिसर और समता नगर (टाकली) के तीनों नमूनों में घुलित ऑक्सीजन का स्तर शून्य पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, तपोवन स्थित कपिला संगम के नमूने में बीओडी 85 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज हुई। पानी का रंग मटमैला-भूरा था और उसमें तेज दुर्गंध भी पाई गई। दसक परिसर (आगरा हाईवे) में बीओडी 52 मिलीग्राम प्रति लीटर, जबकि समता नगर (टाकली) में यह स्तर 17 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया।
गोदावरी की मौजूदा स्थिति ने हरित कुंभ की अवधारणा को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि कुंभ केवल भव्य आयोजन, रोशनी, निर्माण कार्य और भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी धार्मिक गरिमा और पर्यावरणीय महत्ता नदी की स्वच्छता से भी जुड़ी है।
जब जल परीक्षण में तीन स्थानों पर ऑक्सीजन का स्तर शून्य सामने आया है, तब नदी की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
नदी प्रेमी निशिकांत पगारे ने कहा कि गोदावरी बचेगी, तभी कुंभ मेले की पवित्रता और महत्ता कायम रहेगी। प्रशासन को केवल आयोजन की तैयारियों के बजाय नदी के वास्तविक पुनरुद्धार को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि एक ओर हरित कुंभ की घोषणाएं होंगी और दूसरी ओर नदी प्रदूषण की समस्या बनी रहेगी।
गोदावरी नदी में सीधे छोड़े जा रहे अनुपचारित गंदे पानी को रोकने, प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर कार्रवाई करने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कार्यप्रणाली प्रभावी बनाने की मांग की गई है। इसके साथ ही नदी के पुनरुद्धार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने पर जोर दिया गया है।