1956 के बाद सिंहस्थ में त्रिखंड योग से ऐतिहासिक होगा कुंभ, गोदावरी में प्रवाहित होगी विशेष ब्रह्मांडीय ऊर्जा

Simhastha Kumbh Trikhand Yog: नासिक सिंहस्थ कुंभ में 1956 के बाद फिर दुर्लभ त्रिखंड योग बनने का दावा किया जा रहा है। गुरु के तीन बार सिंह राशि में गोचर से बने इस योग को विशेष माना जा रहा है।
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नासिक सिंहस्थ कुंभ एआय जनरेटेड फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nashik Simhastha Kumbh: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नासिक में कुंभ मेला (सिंहस्थ) तब आयोजित होता है जब बृहस्पति (गुरु) ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है। इस बार बनने वाले 'त्रिखंड योग' या 'त्रिखंडी योग' के दौरान, बृहस्पति ग्रह कर्क राशि से सिंह राशि में, फिर कन्या राशि में और पुनः वक्री व मार्गी चाल चलते हुए सिंह राशि में तीन बार प्रवेश करेगा। गुरु ग्रह के सिंह राशि में इस तरह तीन बार गोचर करने (तीन खंडों में विभाजित होने) की खगोलीय घटना को ही 'त्रिखंड योग' कहा गया है। इससे पहले ऐसा दुर्लभ योग वर्ष 1956 के कुंभ पर्व के दौरान देखा गया था।

जो लगभग 70 साल बाद इस बार नासिक कुंभ में त्रिखंड योग का प्रभाव और महत्व के कारण ही इस बार का सिंहस्थ महापर्व बेहद अनूठा और ऐतिहासिक होने जा रहा है। यही कारण है कि जहां एक तरफ मेला विकास प्राधिकरण और महाराष्ट्र सरकार कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में अभूतपूर्व बदलाव की तैयारी में वही देश भर के साधु संत भी विशेष तैयारी में है क्योंकि अधिकतर लोगों का मानना है कि यह दिव्य अलौकिक अवसर बार-बार नहीं आता और जब अब 70 साल बाद इसका लाभ उठाने का पुण्य अवसर मिला है तो कोई भी इसे खोना नहीं चाहता है।

लंबी अवधि तक आध्यात्मिक पर्वकाल

सामान्यतः कुंभ मेला एक वर्ष का होता है, लेकिन त्रिखंड योग के चलते इस बार का कुंभ 31 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2028 तक (लगभग 21-22 महीने) चलेगा। इससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं और साधु-संतों को लंबी अवधि तक अनुष्ठान और साधना करने का अवसर मिलेगा यही नहीं स्नान पर्वों और मुहूर्तों की संख्या में भी वृद्धि हुई है त्रिखंड योग के कारण इस बार कुंभ के मुख्य तिथियों और पर्वों में बड़ा बदलाव हुआ है। इस बार कुल 42 मुख्य पर्व (सीजन्स) और तीर्थस्नान व दर्शन के कुल 97 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

गोदावरी में पवित्र स्नान सेअमृत तुल्य ऊर्जा

मान्यता है कि त्रिखंड योग की इस दुर्लभ खगोलीय स्थिति के दौरान गोदावरी नदी के जल में एक विशेष ब्रह्मांडीय ऊर्जा प्रवाहित होती है, जिससे जल 'अमृत' के समान पवित्र हो जाता है। इस अवधि में रामकुंड (नासिक) और कुशावर्त तीर्थ (त्र्यंबकेश्वर) में किया गया शाही स्नान व अमृत स्नान हजार जन्मों के कर्मों के बंधनों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। यही कारण है कि प्रशासनिक और पर्यटन प्रभाव: कुंभ की अवधि दोगुनी होने के कारण नासिक और त्र्यंबकेश्वर में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है।

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तंत्र साधना में त्रिखंड योग का विशेष महत्व

ज्योतिषी और तंत्र साधना के साधकों के लिए श्रीखंड योग का विशेष महत्व बताया जाता है। अधिकतर साधकों का मानना है कि इस दौरान राजयोग के लिए जगत जननी मां त्रिपुर सुंदरी की साधना की सिद्धि या यह कहा जाए कि श्री महाविद्या की साधना का विशेष योग या सहयोग भी मिलता है। दावा किया जाता है कि यही कारण है कि इस बार नासिक में देश भर के विभिन्न संप्रदायों के साधु संतों के साथ ज्योतिषों और तांत्रिकों का विशेष जमघट देखा जा सकता है।

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