नासिक-त्र्यंबकेश्वर में निर्माल्य प्रबंधन का बनेगा राष्ट्रीय मॉडल, सिंहस्थ कुंभमेला 2027 को मिलेगा ग्रीन मॉडल
Simhasta Kumbh Mela Preparations: सिंहस्थ कुंभमेला को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर प्राधिकरण निर्माल्य प्रबंधन का स्थायी मॉडल तैयार करेगा। 18 जून को होगी ट्रस्टियों की बैठक।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
सिंहस्थ कुंभमेला (सोर्सः फाइल फोटो)
Kumbh Mela 2027 Preparations Waste Management In Nashik: आगामी सिंहस्थ कुंभमेला 2027 को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संपन्न कराने को नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र के प्रमुख मंदिर संस्थानों के ट्रस्टियों और प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर निर्माल्य (पूजा के बाद बचे फूल-पत्ती) प्रबंधन के लिए एक स्थायी व ठोस योजना तैयार की जाएगी।
इस उद्देश्य के लिए आगामी 18 जून को एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें जिले के प्रमुख मंदिर संस्थानों के ट्रस्टी और प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। बैठक में मंदिर परिसरों में उत्पन्न होने वाले निर्माल्य, फूलों और पूजा-अर्चना के बाद एकत्रित होने वाली अन्य सामग्रियों के उचित संग्रह और प्रसंस्करण के लिए एक प्रभावी प्रणाली विकसित करने पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य मंदिर संस्थानों के सहयोग से निर्माल्य का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना, पवित्र गोदावरी नदी का संरक्षण करना और सिंहस्थ कुंभमेले से पहले एक स्थायी स्वच्छता व्यवस्था का निर्माण करना है। इस महत्वपूर्ण बैठक में मंदिर स्तर पर निर्माल्य संग्रह प्रणाली, आवश्यक बुनियादी सुविधाओं, परिवहन व्यवस्था और निर्माल्य प्रसंस्करण करने वाली संस्थाओं के साथ आपसी समन्वय स्थापित करने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
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‘वेस्ट टू वेल्थ’ संकल्पना से मिलेगा रोजगार
निर्माल्य प्रबंधन के साथ-साथ इस परियोजना में वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कंचन) की संकल्पना पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इसके तहत एकत्रित किए गए निर्माल्य से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। इस माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का भी प्रयास किया जाएगा।
कुंभमेला प्राधिकरण के अनुसार, सभी मंदिर संस्थानों के मार्गदर्शन और सक्रिय सहयोग से निर्माल्य प्रबंधन का एक ऐसा प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल तैयार किया जाएगा जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा।
धार्मिक परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का समन्वय: आयुक्त
कुंभमेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह कहा कि सिंहस्थ कुंभमेला 2027 हमारी धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच समन्वय स्थापित करने वाली व्यवस्था बनाने का एक बड़ा अवसर है। श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए निर्माल्य का प्रबंधन भी उतने ही सम्मान और जिम्मेदारी के साथ होना आवश्यक है।
मंदिर संस्थानों, नागरिकों और विभिन्न हितधारकों के सहयोग से हमारा प्रयास गोदावरी संरक्षण के साथ-साथ नासिक और त्र्यंबकेश्वर के लिए एक दीर्घकालिक व उपयोगी स्थायी मॉडल विकसित करना है।
