नासिक में आयुष प्रसाद का सख्त आदेश, सभी संस्थानों को SHE पोर्टल पर कराना होगा पंजीकरण
ICC Committee Mandatory: नासिक प्रशासन ने सभी सरकारी, निजी संस्थानों, उद्योगों और कंपनियों को 15 अगस्त तक POSH कानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति गठित कर SHE पोर्टल पर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नासिक,महिलाओं की सुरक्षा, आयुष प्रसाद,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nashik POSH ICC Registration Deadline: नासिक जिले में है। महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने कड़ा रुख अपनाया उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिले के सभी शासकीय, अर्द्धशासकीय, निजी कार्यालयों, उद्योगों, कंपनियों और संस्थानों को अनिवार्य रूप से 15 अगस्त तक’ पीओएसएस’ (कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न) कानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन करना होगा।
साथ ही, इन समितियों का ‘एसएचई’ पोर्टल पर पंजीकरण कराना भी आवश्यक है। आदेश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा और गश्त छात्राओं और
महिलाओं की सुरक्षा के लिए छात्रावासों, बालिका आश्रमशालाओं और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं की सुरक्षा से लेकर बाल अधिकारों तक के मुद्दों पर प्रशासन ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति अपनाए।
सम्बंधित ख़बरें
पेपर लीक के खिलाफ गडचिरोली में जनसैलाब: जंतर-मंतर के आंदोलन की गूंज, सड़कों पर उतरे हजारों छात्र
ST बस का सफर हुआ महंगा! अमरावती से पंढरपुर समेत इन रूटों का किराया बढ़ा, देखें पूरी रेट लिस्ट
कबूतर चुराने की सजा मौत! अमरावती डबल मर्डर केस में चौंकाने वाला खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार
BLO ड्यूटी से परेशान शिक्षक हाईकोर्ट जाएंगे, बढ़ते कार्यभार के खिलाफ रिट याचिका की तैयारी
नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में आयुष प्रसाद ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर समितियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी ढंग से कार्यरत होना अनिवार्य है।
संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिले के सभी संस्थानों की जांच करें और नियम का पालन न करने वालों पर जुर्माना व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। हर कार्यस्थल पर महिलाओं को भेदभावमुक्त और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करना संस्थान की कानूनी जवाबदेही है।
महिलाओं और बच्चों के कल्याण हेतु विशेष पहल
जिलाधिकारी ने घरेलू हिंसा, बाल विवाह और अन्य सामाजिक मुद्दों पर प्रशासन को अधिक संवेदनशील और सक्रिय रहने का निर्देश दिया है- प्रत्येक गांव में विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं का विशेष सर्वेक्षण किया जाएगा।
आंगनवाड़ी सेविकाओं के माध्यम से उनके जरूरी दस्तावेजों (जैसे (आधार कार्ड) आदि) का सत्यापन कर, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष बहुविभागीय सेवा शिविर आयोजित होंगे।
यह भी पढ़ें:-हज यात्रियों को मिली बड़ी राहत: हज-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ी, 24 जुलाई तक करें अप्लाई
बाल विवाह रोकने के लिए पुलिस पाटिल और ग्रामसेवको की बैठकें होंगी। साथ ही, विवाह सेवा प्रदाताओं (मैरिज हॉल/पंडित) से शपथपत्र लिया जाएगा कि वे बाल विवाह में कोई सहयोग नहीं करेंगे, जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल कानूनी प्रक्रिया से ही दतक ग्रहण हो सकता है।
नोटरी या स्टांप पेपर पर होने वाले अवैध दत्तक मामलों को रोकने के लिए उप-पंजीयकों को सख्त निर्देश दिए गए है। सरकारी कार्यालयों में आने वाली गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए हर दफ्तर में नौडल अधिकारी नियुक्त होगा, जो उनके कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएगा।
