नासिक मनपा में महिला शक्ति का उदय, 122 में 67 महिला पार्षद, 55% सीटों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व
Women Leadership: मनपा चुनाव में 122 सदस्यीय सदन में 67 महिलाएं चुनकर आई हैं। 55% महिला प्रतिनिधित्व ने स्पष्ट किया की मतदाता अब महिलाओं को केवल आरक्षण नहीं, बल्कि नेतृत्व के रूप में स्वीकार कर रहे है
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election Results: नासिक मनपा चुनाव के नतीजों ने न केवल भाजपा के वर्चस्व पर मुहर लगाई है, बल्कि शहर की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी दिया है। इस बार सदन में महिलाओं की ताकत आरक्षित सीमा को पार कर गई है।
122 सदस्यीय सदन में कुल 67 महिलाएं चुनकर आई हैं, जो कुल संख्या का 55 प्रतिशत है। यह आंकड़ा साबित करता है कि नासिक के मतदाताओं ने अब महिलाओं के नेतृत्व को केवल आरक्षण तक सीमित न मानकर, उन्हें सामान्य सीटों पर भी खुले दिल से स्वीकार किया है।
जब महिलाओं ने ‘जनरल’ सीटों पर गाड़ा झंडा
नियम के अनुसार 61 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं, लेकिन 6 जांबाज महिलाओं ने पुरुषों के वर्चस्व वाली सामान्य सीटों पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया। दीपाली गीते (प्रभाग 1): सामान्य श्रेणी की सीट पर बड़ी जीत दर्ज की।
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उषा बेंडकोली (प्रभाग 8): पुरुष उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए अपना परचम लहराया। सविता काले (प्रभाग 11): बाहुबलियों के प्रभाव वाले क्षेत्र में सामान्य सीट पर जीत हासिल की। जागृति गांगुर्डे (प्रभाग 14), आशा तडवी (प्रभाग 16) और संध्या कुलकर्णी (प्रभाग 23): इन्होंने भी खुली श्रेणी की सीटों पर अपनी योग्यता साबित की।
सदन में ‘न्यू ब्लड’ की एंट्री नगर निगम के इस चुनाव में ‘एंटी-इंकंबेंसी’ और बदलाव की लहर साफ दिखाई दी। कुल 122 में से 65 उम्मीदवार पहली बार पार्षद बने हैं। इनमें से कई युवा और उच्च शिक्षित हैं।
कई नए चेहरे पूर्व पार्षदों के परिवार से हैं, जिन्हें आरक्षण के कारण मौका मिला और उन्होंने जीत हासिल की। रंजना भानसी, दिनकर पाटिल और सुधाकर बडगुजर जैसे करीब 45 पुराने दिग्गज अपनी साख बचाने में सफल रहे हैं।
विपक्ष का सूपड़ा साफ, निर्दलीय का रिकॉर्ड
इस बार के नतीजों ने कई स्थापित राजनीतिक दलों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शरद पवार की राकांपा, वंचित बहुजन आघाड़ी, सपा, माकपा और आप जैसे दल अपना खाता भी नहीं खोल सके, मनसे, उबाठा और अजित पवार गुट की सदस्य संख्या में भारी कमी आई है। 122 सीटों के इस महासंग्राम में केवल एक निर्दलीय (मुकेश शहाणे) का जीतना अपने आप में एक रिकॉर्ड है, जो राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाता है।
दिग्गजों की विदाई से हर कोई हैरान
जनता ने इस बार बड़े नामों की परवाह नहीं की। पूर्व महापौर अशोक मुर्तडक, यतीन वाघ की पत्नी और अनुभवी संभाजी मोरुस्कर जैसे नेताओं को हार का सामना करना पड़ा।
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वहीं, मुस्लिम प्रतिनिधित्व में भी एक सीट की कमी आई है, जो भविष्य के चुनावी समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
आरक्षण की सीमा लांघकर 67 जांबाज महिलाएं पहुंचीं सदन
नासिक मनपा में भाजपा का दबदबा बरकरार है, लेकिन 65 नए पार्षदों की मौजूदगी से कामकाज के तरीके में बड़े बदलाव की उम्मीद है।
नए पार्षदों के पास विकास का नया विजन है, जो शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारने में मददगार होगा। 55% महिला पार्षदों की मौजूदगी से स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को सदन में प्रमुखता मिलने की संभावना है।
इन नए और पुराने सदस्यों के सामने अगले साल होने वाले सिंहस्थ कुंभमेले के सफल आयोजन की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
