नासिक मनपा चुनाव: 9 साल बाद लोकतंत्र का उत्सव, शाम के सत्र में उमड़ा जनसैलाब
Democracy Festival: करीब 9 साल बाद हुए नासिक मनपा चुनाव में मतदान लोकतंत्र के उत्सव में बदल गया। शाम के सत्र में भारी भीड़ उमड़ी और कुल मतदान 60 से 62 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election: नासिक करीब नौ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद नासिक मनपा के लिए गुरुवार को हुआ मतदान ‘लोकतंत्र के उत्सव’ में बदल गया। शहर के मतदाताओं ने भविष्य की सरकार चुनने के लिए भारी उत्साह दिखाया।
हालांकि सुबह के समय मतदान की गति कुछ धीमी थी, लेकिन दोपहर बाद शुरू हुआ भीड़ का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। प्रशासनिक अनुमानों के अनुसार, कुल मतदान का आंकड़ा 60 से 62 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी उत्साहजनक माना जा रहा है। दिनभर के मतदान का विश्लेषण करें तो साफ होता है कि शाम के सत्र में मतदाताओं ने बड़ी निर्णायक भूमिका निभाई।
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दोपहर 3:30 बजे तकः शहर में केवल 39.64 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि वोटिंग कम होगी। कामकाज खत्म होने के बाद कामकाजी वर्ग और महिलाओं के बाहर निकलने से मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लग गई।
दिनभर के मतदान का मीटर
चुनाव में शहर के 31 प्रभागों की 122 सीटों के लिए 735 उम्मीदवार मैदान में थे। दिनभर के मतदान का रुझान कुछ इस प्रकार रहा। सुबह 7:30-9:30 बजेः शुरुआत काफी धीमी रही और मात्र 6.50% मतदान दर्ज हुआ।
सुबह 9:30 – 11:30 बजेः रफ्तार बड़ी और मतदान 16.7% तक पहुंच गया। दोपहर 3.30 बजे तकः 8 घंटों की प्रक्रिया के बाद आंकड़ा 39.64% पर पहुंचा। शाम का सत्रः कामकाजी नागरिकों, महिलाओं और युवाओं के निकलने से केंद्रों पर भारी भीड़ देखी गई।
तकनीकी गड़बड़ी और समाधान
शहर के 1563 केंद्रों पर कुल मिलाकर शांतिपूर्ण मतदान हुआ। प्रशासन ने 4860 बैलेट यूनिट और 1800 कंट्रोल यूनिट तैनात की थीं।
केंद्र बदलने से उलझन
इनस बार नासिक महानगरपालिका ने केंद्रों की संख्या बढ़ाई थी। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के पुराने केंद्र बदले जाने से कई मतदाता सुबह भ्रमित नजर आए। हालांकि, केंद्रों की संख्या अधिक होने का लाभ यह मिता कि अधिकांश जगहों पर भीड़ नियंत्रित रही और मतदाताओं को लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी।
मोबाइल पर रही सख्ती
पुलिस आयुक्त और उड़न दस्तों ने शहरभर में गश्त की। सभी केंद्रों पर कड़ा बंदोबस्त होने से कहीं भी अप्रिय घटना नहीं हुई। मतदान केंद्रों के भीतर मोबाइल ले जाने पर पाबंदी थी, जिसे लेकर कुछ जगहों पर पुलिस और नागरिकों के बीच नोकझोंक भी हुई।
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पुलिस ने स्पष्ट किया कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए मोबाइल प्रतिबंध अनिवार्य था। पुलिस आयुक्त और उनकी टीम ने मतदान केंद्रों के आसपास निरंतर पेट्रोलिंग की।
