प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोेर्स: सोशल मीडिया AI )
Nashik Municipal Election Digital Campaign: नासिक महानगरपालिका चुनाव का रण अब पूरी तरह सज चुका है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि, इस बार के चुनाव प्रचार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
उम्मीदवार अब पारंपरिक प्रिंट मीडिया और जमीनी रैलियों के बजाय डिजिटल मीडिया पर अधिक भरोसा दिखा रहे हैं। यही वजह है कि शहर की सड़कों पर वह चुनावी हलचल नजर नहीं आ रही है, जो पहले हुआ करती थी।
कुछ साल पहले तक उम्मीदवार वोटरों तक पहुंचने के लिए समाचार पत्रों का सहारा लेते थे। लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के समय में प्रिंट मीडिया में छपी खबरों का मुद्दा सुर्खियों में आया था, जिसे ‘पेड न्यूज’ कहा गया।
यह मामला कोर्ट तक पहुंचा था। इसके बाद इलेक्शन कमीशन ने प्रिंट मीडिया की हर खबर पर कड़ी नजर रखना शुरू कर दिया। अब इसे ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ का हिस्सा माना जाता है।
यदि कोई खबर प्रचार के उद्देश्य से छपती है, तो उसका खर्च उम्मीदवार के चुनावी खर्च में जोड़ दिया जाता है। कई अखबार अब चुनावी खबरों के नीचे ‘ADVT’ (विज्ञापन) लिखते हैं, जिससे वह सीधा खर्च में गिना जाता है। इसी वजह से कई उम्मीदवारों ने प्रिंट मीडिया से किनारा कर लिया है।
डिजिटल जमाने में उम्मीदवारों के लिए सोशल मीडिया एक सस्ता और प्रभावी माध्यम बन गया है। उम्मीदवार अपनी रील और वीडियो बनाकर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर), टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर अपलोड कर रहे है।
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प्रत्याशियों के समर्थकों का दावा है कि सोशल मीडिया के जरिए वे कम समय में सीधे युवा वोटरों तक पहुंच रहे है, जिससे उन्हें बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है, मोबाइल पर प्रचार सामग्री उपलब्ध होने से उम्मीदवार दिन-रात वोटरों की नजरों के सामने रह रहे है।