बैलपोला की धूम: सूखे की मार और महंगाई के बीच किसानों का अटूट प्रेम, खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़

Nashik Bail Pola Rush: बैलपोला से पहले बाजार मे किसानों की चहल-पहल बढ़ गई है, लेकिन इस बार सजावट किसानों को भारी पड़ रहा है। बैलों की सजावट में युज होने वाली सामग्री के दाम 10 से 35% तक बढ़ गए हैं।
nashik Bail Pola market thrives despite inflation
बैलपोला से पहले बाजार में किसानों की चहल-पहल(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Lasalgaon Bail Pola Market Thrives Despite Inflation: बैलपोला पर्व से पहले नासिक जिले के. लासलगांव का साप्ताहिक बाजार सजावटी सामानों से गुलजार हो गया है।

बैलों के सींगों के रंग, गोंडे, झूल, घुंघरू और रस्सियों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 10 से 35% तक बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद किसान अपने ‘सर्जा-राजा’ को सजाने के लिए उत्साह के साथ खरीदारी कर रहे हैं।

महंगाई और सूखे जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के उत्साह में कमी नहीं आई है। रविवार के साप्ताहिक बाजार में बैलपोला की तैयारियों के लिए किसानों ने जमकर खरीदारी की।

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बैलपोला पर्व का किसानों में उत्साह

महाराष्ट्र में श्रावण मास के अंत में आने वाली अमावस्या को पारंपरिक रूप से बैलपोला पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान वर्षभर खेती के काम में साथ देने वाले अपने प्रिय बैलों ‘सर्जा-राजा’ को नहलाकर, सजाकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

गुरुवार को होने वाले बैलपोला पर्व को देखते हुए रविवार के साप्ताहिक बाजार में लासलगांव में बैलों की सजावट से जुड़ी दुकानों पर काफी चहल-पहल दिखाई दी। बाजार में बैलों के सींगों पर लगाए जाने वाले रंग, गोंडे, झूल, घुंघरू, रस्सियां और कई तरह की सजावटी सामग्री बिक्री के लिए उपलब्ध रही।

सजावटी सामग्री के 35% तक बढ़े दाम

बैलपोला की तैयारियों के बीच इस वर्ष सजावटी सामग्री की कीमतों में पिछले साल की तुलना में करीब 10 से 35% तक की वृद्धि बताई जा रही है। सूखे जैसी परिस्थितियों और महंगाई के कारण किसानों के सामने आर्थिक चुनौतियां हैं।

इसके बावजूद किसानों ने परंपरा को निभाने में कोई कमी नहीं की। बाजार में किसान अपने बैलों के लिए पसंदीदा रंग, झूल, घुंघरू और अन्य सजावटी सामान खरीदते नजर आए।

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सर्जा-राजा बैल के प्रति सम्मान

बैलपोला त्योहार केवल एक पर्व नहीं, बल्कि किसानों और उनके बैलों के बीच वर्षभर के सहयोग और आत्मीय संबंध को सम्मान देने की परंपरा है। खेती के काम में बैलों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए किसान उन्हें सजाते और पूजा करते हैं।

लासलगांव बाजार में बढ़ी भीड़ से बैलपोला को लेकर ग्रामीण क्षेत्र में उत्साह साफ नजर आ रहा है। महंगाई के बावजूद किसानों का परंपरा और अपने ‘सर्जा-राजा’ के प्रति प्रेम कायम है।

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