

Krishna Janmashtami 2026: इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
हालांकि, भगवान कृष्ण की पूजा रात के 12 बजे की जाती है, इसलिए जन्म की मध्यरात्रि पूजा का समय 5 सितंबर की शुरुआत का होगा, इसलिए कई जगह 5 सितंबर को जन्माष्टमी की पूजा का भी जिक्र मिलता है। अष्टमी तिथि 4 सितंबर को शुरू होकर 5 सितंबर की रात तक रहेगी।
पूजा के लिए बाल कृष्ण या लड्डू गोपाल की साफ-सुथरी प्रतिमा रखें और उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाएं।
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार करें। मध्यरात्रि में इसी से कान्हा का अभिषेक किया जाता है। कान्हा को पंचामृत से स्नान कराएं।
कान्हा को पंचामृत से स्नान कराने के बाद गंगाजल से अभिषेक करें और कान्हा की मूर्ति को अच्छी तरह से गंगाजल से स्नान कराएं। पूजा के दौरान गंगाजल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
भगवान श्री कृष्ण को तुलसी बेहद प्रिय मानी जाती है। सभी भोग में तुलसी दल का इस्तेमाल जरूर करें। इसके बिना प्रभु श्रीकृष्ण भोग को स्वीकार नहीं करते हैं।
कान्हा के प्रिय भोग में माखन-मिश्री सबसे ऊपर आता है। कान्हा को माखन बेहद पसंद है। इसे कान्हा की पूजा के दौरान प्रसाद के रूप में जरूर रखें।
भोग के लिए मौसमी फल और घर की बनी सादी सी खीर या हलवा भी भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है। इसके अलावा घर पर बनी सात्विक मिठाई भी रख सकते हैं।
पूजा की थाली में ताजे फूल रखें। चाहें तो लड्डू गोपाल के लिए प्रेम पूर्वक फूलों की माला भी तैयार कर सकते हैं। सभी श्रृंगार के साथ कान्हा को ताजे फूलों की माला चढ़ाएं।
लड्डू गोपाल को साफ और सुंदर पीले या पसंद के पारंपरिक वस्त्र पहनाएं। उनके लिए मुकुट, बांसुरी और अन्य श्रृंगार सामग्री भी लाएं। श्रीकृष्ण का श्रृंगार पूरे मन से करें।
पूजा के लिए घी का दीपक, धूप और अगरबत्ती जलाएं। कान्हा के जन्म के समय आरती के दौरान दीपक जलाएं और भगवान की आरती गाते हुए उन्हें अर्पित करें।
बाल गोपाल को झूले में विराजमान करने की परंपरा है, लेकिन इससे पहले झूला को फूलों से या DIY तरीके से भी सजा सकते हैं। पूजा से पहले झूले को तैयार रखें और पूजा के बाद कान्हा को झूले में रखें और झूला झुलाएं।
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा करते हैं। सबसे पहले लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद साफ जल से स्नान कराएं और उन्हें नए वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें।
कान्हा को झूले में विराजमान करें और माखन-मिश्री, फल, मिठाई व अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल रखना न भूलें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
अंत में कान्हा को झूला झुलाएं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। जन्माष्टमी की पूजा अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार ही किया जाना चाहिए।