

Nashik-Trimbakeshwar Kumbh Mela: सिंहस्थ कुंभमेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को सीधे धरातल पर परखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की। इसके पश्चात अधिकारियों की संयुक्त टीम ने नासिक और त्र्यंबकेश्वर के प्रमुख घाटों का मैदानी निरीक्षण किया।
कुंभमेला प्राधिकरण के सभागार में प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह की अध्यक्षता में यह बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद, निवासी उपजिलाधिकारी रोहितकुमार राजपूत, कुंभमेला प्राधिकरण के अतिरिक्त आयुक्त कमलाकर रणदिवे सहित विभिन्न प्रशासनिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, कुंभमेला प्राधिकरण और संबंधित विभागों के अधिकारियों के संयुक्त दल ने दसक गंगाघाट, कपिला संगम, नंदिनी संगम, रामकुंड और सोमेश्वर घाटों का दौरा किया। इस दौरान श्रद्धालुओं की सम्भावित भीड़, आपातकालीन निकास/प्रवेश मार्ग, बचाव दलों की त्वरित आवाजाही और आपात प्रतिक्रिया से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं का विस्तृत जायजा लिया गया।
इसके बाद संयुक्त दल ने त्र्यंबकेश्वर पहुंचकर वहां के प्रमुख घाटों का भी निरीक्षण किया। किसी भी आपात स्थिति में राहत व बचाव टीमों को अविलंब घटनास्थल तक पहुंचाने के लिए आवश्यक मार्गों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता की जांच की गई।
कुंभमेला प्राधिकरण आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि कुंभमेले से पूर्व संभावित जोखिमों की जमीनी पहचान कर प्रतिक्रिया प्रणाली को अधिक सक्षम बनाना अत्यंत आवश्यक है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ हुई बैठक तथा संयुक्त निरीक्षण इसी रणनीति का हिस्सा है। संभावित खतरों को चिन्हित कर बचाव क्षमता बढ़ाना और सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता है।