कुंभ मेले की ‘आत्मा’ कोमा में! 30 हजार करोड़ का बजट, लेकिन गोदावरी संवर्धन विभाग के पास न पैसा, न स्टाफ
Godavari River Pollution News: नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 30,000 करोड़ का बजट, लेकिन गोदावरी नदी की अनदेखी। जानें क्यों 'पोस्टमैन विभाग' बना गोदावरी संवर्धन कक्ष।
- Written By: गोरक्ष पोफली
गोदावरी नदी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Godavari River Pollution: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को लेकर नासिक में विकास कार्यों का ढोल पीटा जा रहा है। 30,000 करोड़ रुपये के भव्य बजट और बुनियादी ढांचे के विकास की बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं, लेकिन जिस गोदावरी नदी के अस्तित्व से इस मेले की पहचान है, वही नदी आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। नदी के संरक्षण के लिए विशेष रूप से बनाया गया ‘गोदावरी संवर्धन विभाग’ आज खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है।
विभाग की दयनीय स्थिति: न फंड, न स्टाफ
महानगरपालिका के इस महत्वपूर्ण विभाग की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इतने विशाल नदी क्षेत्र की जिम्मेदारी के लिए विभाग में मात्र चार कर्मचारी और एक अधिकारी तैनात हैं। बजट में इस विभाग के लिए कोई ठोस वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है, जिसके कारण यह विभाग केवल पत्राचार और बैठकों के समन्वय तक सीमित रह गया है। जानकारों का कहना है कि यह विभाग अब केवल एक ‘पोस्टमैन’ की भूमिका निभा रहा है, जहाँ फाइलों का आदान-प्रदान तो होता है, लेकिन धरातल पर काम शून्य है।
हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी?
मुंबई उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों (जनहित याचिका 176/2012) के बाद गोदावरी संरक्षण कक्ष की स्थापना एक पूर्णकालिक विभाग के रूप में की गई थी। इस विभाग से सीवेज और कचरे को नदी में मिलने से रोकना, 19 किलोमीटर लंबे प्रवाह क्षेत्र से जलकुंभी और गंदगी हटाना, घाटों का सौंदर्यीकरण और जल की गुणवत्ता बनाए रखने की अपेक्षा की थी हालाँकि, वास्तविकता इसके उलट है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद गोदावरी आज भी जलकुंभी से पटी हुई है।
सम्बंधित ख़बरें
Gadchiroli: आष्टी में ट्रैफिक सिग्नल बने शोपीस, लोग पूछ रहे कब होंगे शुरू
पैंगोलिन संरक्षण में ताडोबा की अनोखी पहल, रेडियो टेलीमेट्री से होगी निगरानी
नासिक में LPG Gas संकट, नए कनेक्शन बंद, छोटे सिलेंडर के सहारे चल रही रसोई
वंदे भारत का स्लीपर अवतार जल्द देगा दस्तक, मुंबई से बेंगलुरु की दूरी होगी और आसान, लॉन्च की तैयारी तेज
सिर्फ कागजों पर ‘समीक्षा’ की बाढ़
नदी प्रदूषण को लेकर विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में त्रैमासिक और मनपा आयुक्त की अध्यक्षता में मासिक बैठकें नियमित रूप से होती हैं। ‘चलो जानें नदी को’ जैसे अभियान भी कागजों पर खूब चमकते हैं। लेकिन निधि और ठोस कार्ययोजना के अभाव में ये सभी प्रयास ‘दिखावा’ साबित हो रहे हैं। गोदावरी प्रेमी सेवा समिति के अध्यक्ष देवांग जानी ने एसटीपी (STP) पर होने वाले 9.5 करोड़ रुपये के खर्च और नदी की वर्तमान स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
यह भी पढ़ें: खूनी क्लर्क को मिली उम्रकैद! गबन छिपाने के लिए चालक का गला रेता, सीमेंट के साथ कुएं में फेंकी थी लाश
दिखावे से नहीं, इरादे से बचेगी गोदावरी
कुंभ मेला केवल सड़कों और पुलों के निर्माण का नाम नहीं है, बल्कि यह पवित्र नदी के प्रति हमारी आस्था और सम्मान का प्रतीक है। यदि 30,000 करोड़ रुपये के बजट में गोदावरी की सफाई और उसके समर्पित विभाग को सशक्त बनाने के लिए जगह नहीं है, तो यह विकास अधूरा है। नासिक प्रशासन को ‘दिखावे की बैठकों’ से बाहर निकलकर गोदावरी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए ठोस और वित्तीय रूप से सक्षम कदम उठाने होंगे।
