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अखाड़ा परिषद के दोनों अध्यक्षों के त्र्यंबकेश्वर पहुंचने की चर्चा है। संतों को उम्मीद है कि आपसी बातचीत से विवाद का समाधान निकल सकता है।
अखाड़ा परिषद के नेतृत्व और पंजीकरण को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद हैं। अब प्रशासन किस पक्ष को मान्यता देगा, यह बड़ा सवाल है।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक और पुरानी अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरी ने परिषद के पंजीकरण पर आपत्ति जताई है।
Nashik Kumbh Mela 2027: देशभर में मौजूद मान्यता प्राप्त 13 अखाड़े के कुंभ के दौरान प्रशासन सरकार और अखाड़े के बीच में सामान्य की भूमिका निभाने वाला अखाड़ा परिषद इस समय विवादों के कारण चर्चा में है। विवाद का प्रमुख आदरणीय है कि वर्तमान में दो अखाड़ा परिषद अध्यक्ष मैदान में है निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी और दूसरी तरफ मा महा निर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी नेवी अखाड़ा परिषद को रजिस्टर्ड करा कर पुरानी अखाड़ा परिषद की वैधता को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
ऐसे में अब जब दोनों अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष 29 अक्टूबर गुरुवार को त्रंबकेश्वर पहुंच रहे हैं तो सभी अखाड़ों में इस बात की चर्चा चल रही है कि क्या होगा? अधिकतर महंतों का कहना है कि आगे देखिए होता है क्या कोई समाधान निकलेगा या तो फिर घमासान होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक पुराने अखाड़े परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्री महंत हरी गिरी ने अखाड़ा परिषद को रजिस्टर्ड करने पर अपनी तीखी नाराजगी व्यक्त की है उनका कहना है की पुरानी मान्यता और परंपरा को हटाकर अखाड़ा परिषद को रजिस्टर्ड करना कहीं से सही नहीं है श्री महंत हरी गिरी महाराज जी ने तो आगे बढ़कर यह दावा किया कि उन्होंने अपने महंतो संतो महामंडलेश्वरों से अपने नाम से भी अखाड़ा परिषद को रजिस्टर्ड करने की बात कही है और यह संख्या 1 लाख तक पहुंच जाएगी अब प्रशासन जो सही होगा उसको बुलाएगा?
इस संबंध में बड़ा उदासीन अखाड़े के भ्रमणशील मंडल के श्री महंत दुर्गादास महाराज जी का कहना है कि दोनों अध्यक्ष आ रहे हैं और एक बार सभी आपस में बैठकर कोई समाधान निकालने का प्रयास करेंगे अखाड़ा को रजिस्टर्ड करने के सवाल पर उनका कहना था कि जब एक संस्था रजिस्टर्ड हो गई तो उसके नाम का दूसरा कोई उपयोग नहीं कर सकता श्री महंत दुर्गादास महाराज जी का कहना है कि यह बहुत बड़ा गंभीर मामला नहीं है आपस में बैठकर इसका समाधान निकाला जा सकता है और सभी अखाड़ों के प्रमुख संतों का महंतों का प्रयास यही होगा।
वर्तमान में जो अखाड़ा परिषद को लेकर माहौल है ठीक ऐसा ही 14 में नासिक कुंभ के दौरान भी देखने को मिला था जहां एक तरफ महंत ज्ञान दास अपने को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बता रहे थे तो दूसरी तरफ महंत नरेंद्र गिरी और यह विवाद बहुत ज्यादा तूल पकड़ चुका था लेकिन नासिक मेला प्रशासन ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के रूप में महंत नरेंद्र गिरी को मान्यता दे दी और यह विवाद खत्म हो गया था अब देखना है कि इस बार नासिक मेला प्रशासन प्राधिकरण क्या निर्णय लेता है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के रूप में किसी को मान्यता देता है या फिर बिना अखाड़ा परिषद के ही कुंभ कार्य को संपन्न और सफल बनाने का निर्णय लेता है। वैसे इतिहास के पन्नों में कई कुंभ स्थलों का यह प्रमाण है कि अखाड़ा परिषद में विवाद की स्थिति को देखते हुए अखाड़ा परिषद की भूमिका को दरकिनार करके मेला कुंभ प्रशासन सीधे प्रत्येक अखाड़े के प्रतिनिधियों से वार्ता करके कुंभ मेला को सफल और संपन्न कर चुका है।