कुंभ में मुस्लिम प्रवेश व दुकान विवाद पर अखाड़ा परिषद बैकफुट पर! मोहन भागवत के बयान से संतों में असमंजस

Kumbh Mela Muslim Controversy: कुंभ मेले में मुस्लिम प्रवेश और दुकानों पर अखाड़ा परिषद बैकफुट पर है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के सकारात्मक बयान के बाद संत समाज में असमंजस की स्थिति है।
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महंत रवींद्रपुरी महाराज और मोहन भागवत(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Kumbh Mela Muslim Entry Controversy: प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान मुस्लिम समाज के प्रवेश, दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों पर कड़ा प्रतिबंध लगाने की घोषणा करने वाला अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) अब अपने रुख को लेकर बैकफुट पर आता नजर आ रहा है।

नासिक में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को लेकर अखाड़ा परिषद अपने पुराने सख्त आदेश पर पुनः विचार करने की तैयारी में है। अखाड़ा परिषद के इस बदलते रुख के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा अमेरिका में दिया गया सकारात्मक बयान माना जा रहा है, जिसने संत समाज के भीतर गहन मंथन और उहापोह की स्थिति पैदा कर दी है।

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा बयान

दरअसल, अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित बहु-धार्मिक शिखर सम्मेलन यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुस्लिम समाज को लेकर एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह व्यक्ति हिंदू नहीं रह जाता।

भागवत ने यह भी रेखांकित किया कि 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा का अर्थ मुसलमानों को देश से बाहर निकालना बिल्कुल नहीं है, बल्कि वे इस राष्ट्र का एक अभिन्न हिस्सा हैं। संघ प्रमुख के इस वक्तव्य के बाद से ही धार्मिक संगठनों और संतों के बीच अखाड़ा परिषद के पूर्व फैसलों को लेकर पुनर्विचार की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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प्रयागराज महाकुंभ में क्यों लगाया गया था प्रतिबंध?

इससे पहले प्रयागराज महाकुंभ 2025 के आयोजन के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और कुछ संत संगठनों ने मेला क्षेत्र में गैर-सनातनियों और मुसलमानों के प्रवेश, दुकानों तथा खाद्य पदार्थों के छोटे-छोटे स्टॉल लगाने पर पूर्ण रोक लगाने का फैसला सुनाया था। उस समय संत समाज ने तर्क दिया था कि मेले की धार्मिक पवित्रता, शुद्धता और स्वच्छता को हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए।

इसके समर्थन में खाद्य पदार्थों की शुद्धता से खिलवाड़ के दावों से जुड़े कुछ वायरल वीडियो का हवाला भी दिया गया था।

इस फैसले के कारण संत समाज की छावनी में टेंट लगाने, बिजली, पानी और अन्य दैनिक कार्यों से मुस्लिम कारीगरों व मजदूरों को पूरी तरह दूर कर दिया गया था। हालांकि, महाकुंभ मेला क्षेत्र में टेंट लगाने और इलेक्ट्रिक का कार्य करने वाले अधिकतर लोग मुस्लिम समाज से ही जुड़े थे, जिसके कारण संत समाज और आयोजकों को कई व्यावहारिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ा था।

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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी का बयान

अब नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी महाराज का इस पूरे मुद्दे पर बयान सामने आया है। महंत रवींद्रपुरी ने स्पष्ट किया है कि नासिक कुंभ मेले के संदर्भ में फिलहाल ऐसा कोई भी प्रतिबंधात्मक निर्णय नहीं लिया गया है।

उन्होंने कहा कि सरसंघचालक मोहन भागवत का अमेरिका में मुसलमानों को लेकर जो सकारात्मक दृष्टिकोण सामने आया है, उसको ध्यान में रखा जाएगा। महंत रवींद्रपुरी के मुताबिक, अब इस विषय पर पूरे संत समाज से विस्तार से बातचीत की जाएगी और संघ प्रमुख के बयान को ध्यान में रखकर ही सर्वसम्मति से कोई निर्णय लिया जाएगा।

संघ प्रमुख के बयान के बाद अखाड़ा परिषद के इस नरम पड़ते रुख ने आगामी नासिक कुंभ मेले की व्यवस्थाओं और संत समाज की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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