

महाराष्ट्र के अधीनस्थ न्यायालयों के कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने 17 अक्टूबर को नासिक कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया।
कर्मचारियों ने ‘समान काम, समान वेतन’ के सिद्धांत के तहत संशोधित वेतनमान लागू करने की मांग की।
मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा 31 जनवरी 2025 को भेजे गए वेतन संशोधन प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लंबित होने का दावा।
शेट्टी आयोग और के. पी. बक्षी समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग उठाई गई।
मांगें पूरी नहीं होने पर 24 दिसंबर को नागपुर में प्रदर्शन और 5 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सांकेतिक उपवास की चेतावनी।
Nashik Judicial Employees Salary Revision: महाराष्ट्र के अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत और सेवानिवृत्त न्यायिक कर्मचारियों ने वेतन संशोधन की मांग को लेकर 17 अक्टूबर को नासिक जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया। कर्मचारियों ने समान काम, समान वेतन के सिद्धांत के तहत संशोधित वेतनमान और अन्य आर्थिक लाभ लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि मुंबई उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी 2025 को संशोधित वेतनमान लागू करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था, लेकिन करीब नौ महीने बाद भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
कर्मचारियों ने शेट्टी आयोग और के. पी. बक्षी समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए लंबित प्रस्ताव पर जल्द कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि समाधान नहीं निकलने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने 5 नवंबर को सांकेतिक उपवास और 24 दिसंबर को नागपुर में प्रदर्शन की योजना बताई है।
नासिक, महाराष्ट्र के अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत और सेवानिवृत्त न्यायिक कर्मचारियों ने संशोधित वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को नासिक जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया। कर्मचारियों ने समान काम, समान वेतन के सिद्धांत के आधार पर वेतनमान में संशोधन और लंबित आर्थिक लाभों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की गई और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के अनुसार, मुंबई उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी 2025 को संशोधित वेतनमान लागू करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था। उनका दावा है कि करीब नौ महीने बीतने के बावजूद प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। विशेष रूप से वित्त विभाग के स्तर पर प्रस्ताव लंबित रहने से कर्मचारियों में नाराजगी है।
कर्मचारियों का कहना है कि निर्णय में देरी के कारण वे अपेक्षित वेतन संशोधन और अन्य आर्थिक लाभों से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रस्ताव पर जल्द फैसला लेकर संशोधित वेतनमान लागू किया जाए।
न्यायिक कर्मचारियों ने वेतन और भत्तों में संशोधन के लिए गठित शेट्टी आयोग तथा बाद में के. पी. बक्षी समिति की सिफारिशों का भी उल्लेख किया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इन समितियों ने वेतन संशोधन को लेकर सिफारिशें की थीं, लेकिन उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
कर्मचारियों ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों का स्टाफ न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालतों के दैनिक कामकाज और न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में वेतन संशोधन का मामला लंबे समय तक लंबित रहना उनके अनुसार चिंता का विषय है।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने सरकार से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, राज्य के सेवानिवृत्त न्यायिक कर्मचारी 5 नवंबर 2026 को एक दिवसीय सांकेतिक उपवास करेंगे। वहीं, 24 दिसंबर को नागपुर में प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी गई है।
अब इस मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभागों के निर्णय पर कर्मचारियों की नजर रहेगी। फिलहाल, वेतन संशोधन प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।