(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Igatpuri Hostel Case: महाराष्ट्र के नासिक जिले के अंतर्गत आने वाले इगतपुरी में एक सरकारी छात्रावास के भीतर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित एक छात्रावास में रहने वाले कक्षा 10 के सात छात्रों पर अपने ही जूनियर साथियों का यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले के उजागर होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में सात नाबालिग छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें सुधार गृह भेज दिया है।
पुलिस जांच में जो खुलासे हुए हैं वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। बताया जा रहा है कि यह प्रताड़ना पिछले सात महीनों से जारी थी। आरोपी छात्र कथित तौर पर कक्षा 5 से 7 के छोटे बच्चों को नशीली या बेहोशी की दवा देते थे और फिर उनके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते थे। डर और खौफ के कारण मासूम छात्र अब तक चुप्पी साधे हुए थे।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात छात्रावास अधीक्षक (वार्डन) सुशांत दुधसागरे की भूमिका रही। जांच में पता चला है कि पीड़ित छात्रों ने अपनी आपबीती अधीक्षक को बताई थी, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से लेने के बजाय नजरअंदाज कर दिया। पुलिस ने कर्तव्य में लापरवाही बरतने और अपराध को छिपाने के आरोप में अधीक्षक के खिलाफ भी पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
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नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि 3 मार्च को इगतपुरी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। सात छात्रों और अधीक्षक को नामजद किया गया है। बाल कल्याण समिति (CWC) फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब नए प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, सातों आरोपी छात्रों को हिरासत में लेकर किशोर सुधार गृह भेज दिया गया है, जबकि पुलिस अधीक्षक की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।