शरद पवार व नामांकन दाखिल करते पार्थ पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sharad Pawar And Parth Pawar Nomination: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘पवार बनाम पवार’ का हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। राज्य के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक, पवार परिवार के दो सदस्य अब एक ही समय में राज्यसभा पहुंचने की होड़ में हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख और राजनीति के दिग्गज शरद पवार (85) और उनके पोते पार्थ पवार ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने-अपने नामांकन दाखिल कर दिए हैं। जहां शरद पवार विपक्षी महा विकास अघाडी (MVA) के उम्मीदवार हैं, वहीं पार्थ पवार को सत्ताधारी एनसीपी ने मैदान में उतारा है।
यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। यदि पार्थ पवार इस चुनाव में जीत हासिल करते हैं, तो यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहला मौका होगा जब शरद पवार और उनके पोते एक साथ संसद के सदस्य के रूप में मौजूद होंगे।
इस चुनाव की पृष्ठभूमि बेहद भावुक और राजनीतिक रूप से जटिल है। पार्थ पवार के पिता और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती में एक दुखद विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनके निधन के बाद राज्य की राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया है। शरद पवार, जो चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और केंद्र में रक्षा व कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं, अब विपक्षी गठबंधन की ओर से मैदान में हैं। कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से शरद पवार की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। एआईसीसी महासचिव रमेश चेन्नीथला के अनुसार, एमवीए में शामिल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (यूबीटी) के बीच शुरुआती खींचतान के बाद अंततः शरद पवार के नाम पर सहमति बनी।
पार्थ पवार के लिए यह राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा है। इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मावल सीट से हार का सामना करना पड़ा था। हाल ही में वह पुणे के मुंधवा में एक विवादित भूमि सौदे को लेकर भी चर्चा में रहे थे। 300 करोड़ रुपये के इस सौदे में आरोप लगा था कि सरकारी जमीन एक निजी कंपनी को बेची गई और उसे स्टांप शुल्क में भी छूट मिली, जिसके बाद इस सौदे को रद्द करना पड़ा था।
राज्यसभा निवडणुकीच्या पार्श्वभूमीवर आज उमेदवारी अर्ज दाखल केला. राष्ट्रवादी काँग्रेस परिवारातील ज्येष्ठ नेते, पदाधिकारी आणि कार्यकर्त्यांनी माझ्यावर दाखवलेल्या विश्वासाबद्दल मी सर्वांचे मनापासून आभार मानतो. हा क्षण माझ्यासाठी केवळ राजकीय टप्पा नसून मोठ्या जबाबदारीची जाणीव करून… pic.twitter.com/vcbv8vzrHb — Parth Sunetra Ajit Pawar (@parthajitpawar) March 5, 2026
शरद पवार द्वारा 1999 में गठित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जुलाई 2023 में दो गुटों में बंट गई थी। अजित पवार के भाजपा और शिवसेना की महायुति सरकार में शामिल होने के बाद पार्टी विभाजित हो गई थी और पवार परिवार में दरार आ गई थी।
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पवार परिवार के भीतर की यह दरार 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी थी। उस समय शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने बारामती सीट पर अपनी भाभी और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराया था। उस चुनाव प्रचार के दौरान अजित पवार ने मतदाताओं से “असली पवार” के नाम पर वोट मांगा था, जिसके जवाब में शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को ही “असली पवार” बताया था। इसके बाद सुनेत्रा राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुईं थी।
राज्यसभा की 7 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव का गणित भी काफी रोचक है। महाराष्ट्र विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, भाजपा आसानी से तीन सीटें जीत सकती है और चौथी सीट के लिए कड़ी टक्कर दे सकती है। शिवसेना और एनसीपी (अजित गुट) को भी एक-एक सीट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, एमवीए का संयुक्त संख्या बल भी कम से कम एक उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है। यदि क्रॉस वोटिंग नहीं होती है, तो महायुति गठबंधन को छह सीटों पर जीत की उम्मीद है। 16 मार्च को होने वाला यह चुनाव तय करेगा कि पवार परिवार की अगली पीढ़ी का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाएगा।