Grapes Export Decline: नासिक अंगूर निर्यात में 35% की भारी गिरावट, बारिश और युद्ध ने तोड़ी किसानों की कमर

Grapes Export Decline 2026: नासिक के अंगूर उत्पादकों पर दोहरा संकट! बेमौसम बारिश और मध्य-पूर्व तनाव के कारण अंगूर निर्यात में 35% की कमी आई है। जानें निर्यात के आंकड़े और किसानों की व्यथा।
Grapes Export Decline: Massive 35% Drop in Nashik Grape Exports; Rain and War Break the Farmers' Backs
नासिक के अंगूर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Grapes Export: महाराष्ट्र का 'कैलिफोर्निया' कहा जाने वाला नासिक इन दिनों एक गंभीर कृषि संकट के मुहाने पर खड़ा है। विश्व प्रसिद्ध नासिक के अंगूरों पर इस साल प्रकृति की नाराजगी और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव का ऐसा ग्रहण लगा है कि निर्यात के आंकड़ों में 35 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस स्थिति ने न केवल जिले की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि हजारों अंगूर उत्पादक किसानों की आय पर भी सीधा प्रहार किया है।

आंकड़ों में गिरावट का गणित

सरकारी और व्यापारिक संगठनों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू सीजन में अब तक केवल 3,870 कंटेनरों के माध्यम से 54,825 मीट्रिक टन अंगूर निर्यात किया जा सका है। यदि हम इसकी तुलना पिछले वर्ष से करें, तो स्थिति चिंताजनक लगती है। पिछले साल इसी अवधि तक 6,165 कंटेनरों के जरिए 83,146 मीट्रिक टन अंगूर का निर्यात किया गया था। यह गिरावट सीधे तौर पर किसानों के मुनाफे को शून्य की ओर धकेल रही है।

संकट के दो मुख्य कारण

प्रकृति का प्रकोप (Climate Change): इस सीजन में नासिक के अंगूर बेल्ट में लगातार छह महीनों तक रुक-रुक कर हुई बेमौसम बारिश ने अंगूर के बागों को भारी नुकसान पहुंचाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग 50 प्रतिशत से अधिक बाग बारिश और फंगस के कारण प्रभावित हुए हैं, जिससे निर्यात के लिए आवश्यक गुणवत्ता (Quality) नहीं मिल पा रही है।

ईरान-इजरायल तनाव और लाल सागर (Red Sea) के रास्ते में होने वाली बाधाओं ने अंतरराष्ट्रीय रसद (Logistics) को महंगा और जोखिम भरा बना दिया है। परिवहन लागत में वृद्धि और बीमा दरों (Insurance Premium) में अचानक आए उछाल ने निर्यातकों को कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया है।

प्रमुख देशों को निर्यात की स्थिति

नासिक का अंगूर मुख्य रूप से यूरोपीय देशों को भेजा जाता है, लेकिन वहां भी इस साल मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है:

  • नीदरलैंड: 3,781 कंटेनर (53,655 मीट्रिक टन)
  • जर्मनी: 46 कंटेनर (605 मीट्रिक टन)
  • यूनाइटेड किंगडम: 22 कंटेनर (280 मीट्रिक टन)

किसानों की व्यथा: लागत बढ़ी, दाम घटे

स्थानीय किसान सुनील गवली ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उर्वरकों, कीटनाशकों के छिड़काव और मजदूरी की लागत में 20-30% की वृद्धि हुई है। लेकिन जब फसल बेचने की बारी आई, तो अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के कारण फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन (Export Incentives) या सब्सिडी के रूप में मदद नहीं की, तो अगले साल अंगूर की खेती करना नामुमकिन हो जाएगा।

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