कर्तव्यपथ पर गूंजेंगे नासिक की बेटियों के घुंघरू, सांस्कृतिक वैभव के साथ नृत्यांगनाएं रचेंगी इतिहास

Nashik Girls Republic Day: 26 जनवरी को कर्तव्यपथ पर नासिक की बेटियों के घुंघरू गूंजेंगे। कीर्ति कलामंदिर की 12 नृत्यांगनाएं गणतंत्र दिवस पर भारत की सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन करेंगी।
The tinkling of anklets worn by the daughters of Nashik will resonate on Kartavya Path, as the dancers create history with their cultural splendor
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Kathak Dance India: नासिक आगामी 26 जनवरी को दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्यपथ पर जब गणतंत्र दिवस की भव्य परेड निकलेगी, तब वहां नासिक की बेटियों के घुंघरू पूरी दुनिया को भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएंगे। शहर की प्रतिष्ठित 'कीर्ति कलामंदिर' संस्था की 12 नृत्यांगनाओं का चयन इस गौरवशाली राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए हुआ है।

यह न केवल नासिक बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए गौरव का क्षण है, क्योंकि इस बार राज्य से केवल इसी संस्था को कर्तव्यपथ पर अपनी कला दिखाने का सुनहरा अवसर मिला है। कड़ाके की ठंड में पसीना बहा रही बेटियां नासिक की ये बेटियां ओझर हवाई अड्डे से दिल्ली पहुंच चुकी हैं। राजधानी की कड़ाके की ठंड भी उनके उत्साह को कम नहीं कर पाई है।

दिल्ली के विशाल मैदानों पर सुबह से ही इन छात्राओं का अभ्यास शुरू हो जाता है। संगीत नाटक कला अकादमी और कथक कला केंद्र के दिग्गजों की देखरेख में नृत्य की एक-एक स्टेप को बारीकी से तराशा जा रहा है। परेड के दौरान अपनी प्रस्तुति को ऐतिहासिक बनाने के लिए छात्राएं दिन में 8 से 10 घंटे अभ्यास कर रही हैं।

गणतंत्र दिवस पर नासिक की बेटियों का 'महा-कथक'

उनका लक्ष्य है कि जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने से वे गुजरें, तो नासिक की कला की छाप अमिट हो जाए, यह सफर इतना आसान नहीं था। केंद्र सरकार के सांस्कृतिक विभाग द्वारा देशभर की हजारों नृत्य संस्थाओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा आयोजित की गई थी, पहले क्षेत्रीय स्तर, फिर राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर पर कड़े ऑडिशन हुए।

दिग्गज कोरियोग्राफर्स और शास्त्रीय संगीत के उस्तादों ने नृत्यांगनाओं के हाव-भाव, फुटवर्क और अनुशासन को परखा, कीर्ति कलामंदिर' की छात्राओं ने कथक के कठिन व्याकरण को इतनी सरलता से पेश किया कि परीक्षक भी दंग रह गए और उन्हें महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुन लिया गया इस सफलता के पीछे सालों की कड़ी मेहनत और गुरुओं का मार्गदर्शन है।

वरिष्ठ कथक नृत्यांगना रेखा नाडगौडा और अदिति नाडगौडा-पानसे ने इन छात्राओं को बचपन से ही कथक की बारीकियां सिखाई है। यह सफलता केवल एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों के रियाज का परिणाम है।

इन नृत्यांगनाओं ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कला को जिस तरह साधे रखा, वह आज मिसाल बन गया है। इस दल में याज्ञश्री दारव्हेकर, लावण्या मंडलिक, स्वानंदी मनभेकर, सई गडकरी, गौरी चांदवडकर, गागों गरुड, पायल भट, शलाका जोशी, आर्या मोरे, आनंदी नांदुरकर, समृद्धी अहिरे और श्रावणी कराड शामिल है।

वेशभूषा में दिखेगा महाराष्ट्र का वैभव

सूत्रों के अनुसार, कर्तव्यपथ पर प्रस्तुति के दौरान नृत्यांगनाओं की वेशभूषा विशेष रूप से तैयार की गई है। इसमें कथक के पारंपरिक लिबास के साथ महाराष्ट्र की 'पैठणी' और सांस्कृतिक गौरव की झलक देखने को मिलेगी, सिर पर विशेष मुकुट और पैरों में बंधे सैकड़ों घुंघरू जब एक ताल में बजेंगे, तो वह दृश्य अद्भुत होगा। नासिक की ये नृत्यांगनाएं 'नारी शक्ति' और 'विकसित भारत' की थीम को अपनी कला के जरिए साकार करेगी।

पहली बार 'कीर्ति' को मिला यह सम्मान

नासिक की कला जगत में ' कीर्ति कलामंदिर का नाम दशकों से सम्मान के साथ लिया जाता है, लेकिन गणतंत्र दिवस की मुख्य परेड में शामिल होने का यह अवसर संस्था के इतिहास में एक मील का पत्थर है। अदिति नाडगौडा-पानसे ने बताया कि जब उन्हें चयन का आधिकारिक पत्र मिला, तो सबकी आंखों में खुशी के आंसू थे।

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