गैस संकट के बीच नासिक का फैसला: स्कूलों के मिड-डे मील पर नहीं पड़ेगा असर, 1.15 लाख छात्रों को राहत
Nashik Gas Supply Issue: खाड़ी देशों के तनाव के बीच नासिक प्रशासन ने गैस आपूर्ति संकट से निपटने के लिए सेफ्टी प्रोटोकॉल तैयार किया है। 279 स्कूलों के मिड-डे मील के लिए गैस आपूर्ति जारी रखने का निर्णय।
- Written By: अंकिता पटेल
Mid Day Meal Program Schools( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik LPG Supply Management: नासिक वैश्विक अस्थिरता और खाड़ी देशों के तनाव ने नासिक की गैस वितरण व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। हालांकि, जिले के तीन बड़े केंद्रों जिलाधिकारी कार्यालय, महानगरपालिका और आपूर्ति विभाग ने मिलकर एक ऐसा ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ तैयार किया है, जिससे आम जनता और समाज के संवेदनशील वर्गों को राहत मिल सके।
स्कूलों का चूल्हा रहेगा गरम नगर निगम क्षेत्र के 279 स्कूलों में पड़ने वाले 1.15 लाख छात्रों के लिए अच्छी खबर है। 42 संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे पोषण आहार प्रोजेक्ट की गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी।
महापौर ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के शारीरिक विकास के आधार ‘मिड-डे मील’ में कोई समझौता नहीं होगा। शिक्षा विभाग की अधिकारी डॉ। मिता चौधरी ने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों से सीधा समन्वय कर स्कूलों के लिए गैस आरक्षित की जा रही है।
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प्रशासन का नया ‘प्रायोरिटी लिस्ट’
मॉडल: जिलाधिकारी कार्यालय ने गैस वितरण के लिए एक सख्त वरीयता सूची लागू की है। सरकारी अस्पतालों और समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों को सबसे पहले सिलेंडर मिलेंगे, जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक होटलों और निजी उद्योगों के लिए व्यावसायिक
अफवाहों पर लगाम और छापेमारी के अधिकार
जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि जिले में गैस का स्टॉक पर्याप्त है, समस्या केवल ‘डर’ और ‘पैनिक बुकिंग’ से पैदा हुई है। अब छापेमारी के लिए जिला मुख्यालय के आदेश का इंतजार नहीं करना होगा, तहसीलदारों को सीधे कार्रवाई और गिरफ्तारी के अधिकार दिए गए है।
बिना सिर-पैर की खबरें फैलाने वालों पर सखडबर पुलिस की नजर है, नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक भंडारण न करें ताकि जरूरतमंदों को समय पर सिलेंडर मिल सके जिलाधिकारी आयुष प्रसाद के आदेश पर जिले की प्रत्येक तहसील में विशेष टीमें गठित की गई है। इन टीमों ने अब तक 12 गैस एजेंसियों और 21 होटलों की आकस्मिक जांच की है।
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जांच में पाया गया कि स्टॉक और वितरण दोनों नियमानुसार चल रहे हैं। अब तक की जांच में न तो कोई साठेबाजी मिली है और न ही अधिक कीमत पर सिलेंडर बेचे जाने की कोई ठोस शिकायत सामने आई है।
