

Nashik Ganesh Idol Prices: आगामी गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि में बाजारों में गणेश मूर्तियों का आगमन हो चुका है। हालांकि, इस साल मूर्तियों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गणेश मूर्ति निर्माण के प्रमुख केंद्र आरमपुर में हुई मूसलाधार बारिश के कारण कारखानों को भारी नुकसान पहुंचा है। जलभराव की वजह से तैयार मूर्तियों, कच्चे माल और सांचों की क्षति होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर इस बार की दरों पर पड़ा है।
इसके अलावा, खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण रंगों और अन्य सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे मूर्तियों के दाम और बढ़ गए हैं। खाद्य पदार्थों की महंगाई से परेशान नागरिकों को अब बाप्पा की मूर्ति की बढ़ी हुई कीमतों का भी झटका सहना पड़ेगा।
पर्यावरण के अनुकूल गणेशोत्सव पर जोर दिए जाने के कारण इस साल भक्तों में लाल मिट्टी की मूर्तियों का विशेष क्रेज देखने को मिल रहा है। बेहद आकर्षक और सुघड़ कारीगरी वाली ये लाल मिट्टी की मूर्तियां 1 हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक में उपलब्ध हैं। इसके अलावा, इस वर्ष ऊनी कपड़े और पगड़ी पहने हुए नए प्रकार की मूर्तियां भी बाजार में आई हैं, जिनकी कीमतें 1500 रुपये से शुरू होती हैं।
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पीओपी की मूर्तियां बेची जा सकेंगी या नहीं, इसे लेकर निर्माताओं और विक्रेताओं के बीच काफी भ्रम की स्थिति थी। इस कारण इस साल पीओपी मूर्तियों का उत्पादन कम हुआ है। स्कूल, शासन और प्रशासन की ओर से व्यापक स्तर पर चलाए गए पर्यावरण जागरूकता अभियानों के कारण श्रद्धालुओं का झुकाव लाल मिट्टी और शाडू की मूर्तियों की ओर बढ़ा है। इसके बावजूद पीओपी की मूर्तियां खरीदने वाले भक्तों की संख्या अब भी काफी है। महंगाई और प्राकृतिक आपदा की मार के बावजूद श्रद्धालुओं में बाप्पा के आगमन को लेकर उत्साह बना हुआ है।
साईलीला श्री साई आर्ट्स की सोनाली वैद्य ने कहा कि बारिश के कारण कारखानों को हुआ नुकसान और युद्ध की वजह से कच्चे माल के बढ़े दाम-इन कारणों से गणेश मूर्तियों की कीमतें 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। स्टॉल लग चुके हैं लेकिन अभी ग्राहक कम हैं। आने वाले शनिवार और रविवार की छुट्टी के दिन ग्राहकों की भीड़ जुटने की उम्मीद है।