भंडारा में POP मूर्तियों पर प्रतिबंध जारी, गणेश-दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण और बिक्री पर रोक

POP Idol Ban: भंडारा जिले में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण व बिक्री पर प्रतिबंध जारी रहेगा। प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त पालन के निर्देश दिए हैं।
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Ganesh Idol (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Bhandara Collector Order: भंडारा जिले में प्लास्टर ऑफ पेरिस पी.ओ.पी. से बनी गणेश,दुर्गा आदि प्रतिमाओं के निर्माण एवं बिक्री पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सभी तहसीलदारों, जिला परिषद, नगर परिषद, पंचायत समितियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

यह कार्रवाई माटी मूर्तिकार एवं हस्तकला बहुउद्देशीय संस्था, जिला अध्यक्ष प्रकाश हातेल तथा कुंभार समाज संगठन भंडारा द्वारा 23 जून 2026 को प्रस्तुत ज्ञापन के आधार पर की गई है। आदेश में महाराष्ट्र शासन के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबी के दिशानिर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

POP गणेश प्रतिमाओं की बिक्री पर प्रतिबंध

जिलाधिकारी कार्यालय ने संबंधित सभी विभागों से कहा है कि वे महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करें तथा की गई कार्रवाई की जानकारी निवेदनकर्ताओं को भी उपलब्ध कराएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जल प्रदूषण की रोकथाम तथा पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाओं के उपयोग को बढ़ावा देना है।पर्यावरण अनुकूल उत्सव मनाने की अपीलजिला प्रशासन ने नागरिकों से आगामी उत्सव के दौरान केवल मिट्टी की प्रतिमाओं का उपयोग करने की अपील की है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। मिट्टी की प्रतिमाओं के प्रमुख लाभ जल प्रदूषण नहीं होता। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। प्रतिमा प्राकृतिक रूप से आसानी से विसर्जित हो जाती है। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए सुरक्षित होती है।मूर्तिकारों ने जताया संतोषमाटी मूर्तिकार एवं हस्तकला बहुउद्देशीय संस्था के अध्यक्ष प्रकाश हातेल ने कहा कि पी.ओ.पी. की प्रतिमाओं से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है और पारंपरिक मिट्टी के मूर्तिकारों का रोजगार भी प्रभावित होता है। उन्होंने प्रशासन से बिना किसी भेदभाव के नियमों का कड़ाई से पालन कराने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

पर्यावरण बचाने की पहल

संस्था के सचिव देविदास हटवार ने कहा कि, मिट्टी की प्रतिमाएं भारतीय परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का सर्वोत्तम विकल्प हैं। उन्होंने नागरिकों से पी.ओ.पी.प्रतिमाओं का बहिष्कार कर स्थानीय मिट्टी के मूर्तिकारों से ही प्रतिमाएं खरीदने की अपील की।संस्था के सहकोषाध्यक्ष लिलाधर तेलमासरे ने कहा कि, स्थानीय मिट्टी के मूर्तिकारों को प्रोत्साहन मिलने से एक ओर पर्यावरण संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक कारीगरों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने प्रशासन से पी।ओ।पी। प्रतिमाओं के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने की मांग की।

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