

Encroachment Action Raises Questions On Humanity: दिनभर मेहनत कर दो वक्त की रोटी जुटानी और रात में सिर छिपाने के लिए किसी सुरक्षित जगह का सहारा लेना... इतनी-सी उम्मीद लेकर जी रही एक निराश्रित महिला के साथ शुक्रवार को कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है।
पुराने नासिक के वडाला नाका चौफुली स्थित मुंबई-आगरा महामार्ग के फ्लाईओवर के नीचे आसरा लेकर रहने वाली बेहद गरीब महिला को नासिक महानगरपालिका के अतिक्रमण विभाग के कर्मचारियों ने कथित तौर पर धक्के देकर वहां से भगा दिया।
घटना के बाद नागरिकों में ‘अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन इंसानियत हटाकर नहीं’ जैसी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
बताया जा रहा है कि उक्त महिला ने फ्लाईओवर के नीचे किसी प्रकार का शेड या पक्का निर्माण नहीं किया था। उसके पास रहने के लिए कोई घर या सुरक्षित छत नहीं होने के कारण वह केवल रात के समय खुले स्थान पर आसरा लेती थी।
आरोप है कि अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान मनपा कर्मचारियों ने उसकी स्थिति को समझने या सहानुभूति दिखाने के बजाय उसे डांटते हुए तथा हाथ से धक्का देकर वहां से हटा दिया।
‘मेरा अपना घर नहीं है, मैं आखिर कहां जाऊं?’ इस सवाल का जवाब उस बेबस महिला के पास भी नहीं है और शायद व्यवस्था के पास भी नहीं।
प्रशासन के पास अतिक्रमण हटाने के लिए नियम-कायदे हो सकते हैं, लेकिन उन नियमों को लागू करते समय मानवीय संवेदनाओं और गरीबों के सम्मान का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
नासिक शहर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करना मनपा की जिम्मेदारी है। लेकिन कार्रवाई के दौरान गरीब, बेघर और निराश्रित लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना भी प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।
नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या अतिक्रमण की कार्रवाई केवल गरीबों तक ही सीमित है? क्या प्रभावशाली और संपन्न लोगों के अतिक्रमणों पर भी इसी तरह कार्रवाई की जाती है?
नागरिकों ने इस घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित कर्मचारियों के व्यवहार की तत्काल जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
साथ ही, शहर में बेघर और निराश्रित लोगों के लिए मानवीय दृष्टिकोण से अस्थायी निवास अथवा रात्रि निवारा केंद्र की व्यवस्था करने की मांग भी की जा रही है। अतिक्रमण हटाते समय जगह खाली कराई जा सकती है, लेकिन किसी बेबस इंसान के जीवन से आखिरी सहारा छीन लेना इंसानियत नहीं है।
प्रशासन को नियमों के साथ संवेदनशीलता भी निभानी होगी, यही इस घटना से उठने वाली सबसे बड़ी मांग है। निश्चित रूप से। इस घटना में मानवीय संवेदना, नासिक प्रशासन की जिम्मेदारी और गरीबों के जीवन के संघर्ष का संदर्भ प्रमुखता से सामने आया है।