नासिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में भ्रष्टाचार का आरोप, ‘बिना पैसे कोई काम नहीं’ के नारों से गूंजा जनता दरबार

Nashik Education Office: नासिक में जनता दरबार के दौरान शिक्षकों ने शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध किया। अधिकारियों की गैरहाजिरी से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
Allegations of corruption at the Nashik Deputy Director of Education office; the public grievance redressal meeting resonated with slogans of "No work gets done without money."
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया)
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Teacher Protest Corruption Allegation: नासिक विभागीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय का कामकाज एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। शिक्षकों और प्राध्यापकों की लंबित समस्याओं को हल करने के लिए आयोजित 'जनता दरबार' में शिक्षकों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी।

रबिना पैसे दिए यहां कोई काम नहीं होतार, जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए शिक्षकों ने कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। किशोर दराडे की उपस्थिति में किया गया था। दो घंटे बीत जाने के बाद भी विभागीय शिक्षा उपनिदेशक संजय कुमार राठौड़ और अन्य अधिकारियों के न पहुंचने पर शिक्षकों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित शिक्षकों ने कार्यालय में घुसने का प्रयास किया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा।

अधिकारियों की अनुपस्थिति पर फूटा गुस्सा

नासिक विभाग के चारों जिलों नासिक, अहमदनगर, जलगांव और धुलिया से सैकड़ों शिक्षक अपनी मांगों को लेकर नाशिक रोड स्थित शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में एकत्र हुए थे। इस जनता दरबार का आयोजन शिक्षक विधायक

भ्रष्टाचार के संगीन आरोप

आंदोलनकारी शिक्षकों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कार्यालय के कर्मचारी हर छोटी-बड़ी फाइल को आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग करते हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे जून महीने से दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद उनकी फाइलों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। शिक्षकों ने सवाल उठाया कि समाज का निर्माण करने वालों को ही न्याय के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?

अधिकारियों का स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ता देख शिक्षा उपनिदेशक संजय कुमार राठौड़ ने सामने आकर अपनी सफाई पेश की, उन्होंने कहा कि विभाग वर्तमान में कार्यभार के अत्यधिक दबाव से गुजर रहा है, जिससे कुछ कार्यों में विलंब हो रहा है। उपनिदेशक ने स्पष्ट किया कि जीपीएफ, पेशन और मेडिकल बिल जैसे संवेदनशील कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

विधायक किशोर दराडे की मध्यस्थता के बाद अधिकारियों ने फरवरी तक सभी लंबित कार्यों को पूर्ण करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन शांत हुआ। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले ही इसी कार्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्टाचार के मामले में रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद जेल की हवा खा चुके हैं।

ऐसी दागी पृष्ठभूमि के बावजूद शिक्षकों द्वारा फिर से रिश्वत के आरोप लगाया जाना यह दर्शाता है कि विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के दावे खोखले हैं। अब देखना यह है कि फरवरी तक शिक्षकों को उनका हक मिलता है या उन्हें फिर से सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

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