Nashik Municipal Corporation Politics (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Municipal Corporation Politics: नासिक महापालिका में सत्ता समीकरण बदलने के बाद बहुमत वाली भाजपा के साथ गठबंधन कर शिवसेना (शिंदे गुट) ने उपमहापौर पद हासिल किया है, लेकिन इस पद को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष उभरकर सामने आया है। बढ़ती नाराज़गी को देखते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई में नासिक के नगरसेवकों की विशेष बैठक बुलाई।
इस बैठक में सभी नगरसेवकों को न्याय देने का आश्वासन देते हुए मुंबई-ठाणे पैटर्न लागू करने के संकेत दिए गए। इसके चलते नासिक में उपमहापौर पद का कार्यकाल अब सवा-सवा वर्ष का रखा जाएगा, ऐसी चर्चा राजनीतिक हलकों में तेज हो गई है।
शिवसेना के विलास शिंदे के उपमहापौर चुने जाने के बाद महानगर प्रमुख बंटी तिदमे ने खुलकर नाराज़गी जताते हुए इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। इस घटनाक्रम से पार्टी में हलचल मच गई। बाद में वरिष्ठ स्तर पर समन्वय के प्रयास किए गए और तिदमे को समझाने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया, लेकिन असंतोष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।
इसी पृष्ठभूमि में उपमुख्यमंत्री शिंदे ने नगरसेवकों के साथ विस्तृत चर्चा की। संपर्क नेता राम रेपाले ने इस बैठक के लिए पहल की थी। बैठक में गुटनेता और उपमहापौर पद के चयन के समय कुछ नगरसेवकों को विश्वास में न लेने की शिकायत उठाई गई। निर्णय प्रक्रिया में सभी को शामिल करने की मांग भी की गई।
इस बीच, मुंबई-ठाणे पैटर्न के अनुसार महत्वपूर्ण पदों का कार्यकाल विभाजित करने की परंपरा अपनाई जाती है। उसी तर्ज पर नासिक में भी उपमहापौर पद का कार्यकाल सवा-सवा वर्ष का रखकर अधिक से अधिक नगरसेवकों को अवसर देने का विकल्प चर्चा में है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से पार्टी के भीतर की नाराज़गी कम होगी और संगठनात्मक संतुलन बना रहेगा।
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बैठक के बाद शेष नगरसेवकों को स्थायी समिति तथा अन्य महत्वपूर्ण पदों पर अवसर दिए जाने का संदेश मिलने से गुट में उत्साह का वातावरण है। अब आगामी दिनों में पदों के अंतिम बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।