‘पटक-पटक कर मारेंगे’ बयान देना BJP सांसद निशिकांत दुबे को पड़ा भारी, नासिक कोर्ट ने जारी किया समन
Nishikant Dubey News: मराठी भाषियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में नाशिक कोर्ट ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को 7 अप्रैल को पेश होने का आदेश दिया है। जानें क्या है पूरा विवाद।
- Written By: आकाश मसने
निशिकांत दुबे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nishikant Dubey Nashik Court Summon: भारतीय जनता पार्टी के मुखर सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में मराठी भाषियों के खिलाफ दिए गए उनके एक पुराने कथित बयान ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले में नासिक की जिला सत्र अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सांसद दुबे के खिलाफ समन जारी किया है और उन्हें 7 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
सांसद निशिकांत दुबे पर आरोप है कि उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से मराठी भाषी लोगों का अपमान किया था। याचिका में दावा किया गया है कि दुबे ने कहा था कि यदि मराठी लोग उत्तर प्रदेश या बिहार आते हैं, तो उन्हें ‘पटक-पटक कर’ मारा जाएगा। इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल आ गया था और विभिन्न संगठनों ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी।
मनसे की कानूनी लड़ाई
इस मामले को न्यायिक स्तर पर आगे बढते हुए नासिक जिला मनसे प्रमुख सुदाम कोंबडे ने जिला सत्र न्यायालय में दुबे के खिलाफ याचिका दायर की। उन्होंने दुबे के बयानों को समाज में वैमनस्य फैलाने वाला और अपमानजनक बताया। कोंबडे ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर निशिकांत दुबे में हिम्मत है तो वे नासिक में कदम रखकर दिखाएं। वे लगातार राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे जैसे सम्मानित नेताओं का अपमान कर रहे हैं।”
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राज ठाकरे का पलटवार
निशिकांत दुबे के बयान के जवाब में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने भी उस समय तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ठाकरे ने कहा था कि यदि निशिकांत दुबे महाराष्ट्र की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें ‘डुबो-डुबो कर मारेंगे’।
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चेतावनी के बावजूद नहीं थमे बयान
याचिकाकर्ता सुदाम कोंबडे का कहना है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी दुबे को इस तरह के बेतुके और भड़काऊ बयानों से बचने की सलाह दी थी। इसके बावजूद उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। कोंबडे के अनुसार, मराठी अस्मिता को ठेस पहुंचाने वाले इस ‘बड़बोले’ नेता को कानूनी सबक सिखाना अनिवार्य है। अब सबकी निगाहें 7 अप्रैल पर टिकी हैं कि क्या सांसद दुबे कोर्ट में हाजिर होते हैं या नहीं।
