Nashik Rickshaw Drivers Protest ( Source: Social Media )
Nashik Rickshaw Drivers Protest: नासिक खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न हुए इंधन संकट के बीच शहर में ऑटो एलपीजी की कीमतों को लेकर घमासान शुरू हो गया है। सरकारी मान्यता प्राप्त पंपों और निजी कंपनियों की दरों में जमीन आसमान का अंतर होने के कारण रिक्शा चालक गहरे वित्तीय संकट में फंस गए हैं।
इस मनमानी के खिलाफ रिक्शा-टैक्सी चालक-मालक संगठन के एक शिष्टमंडल ने सोमवार को जिलाधिकारी आयुष प्रसाद से मुलाकात की और निजी प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को बताया कि निजी कंपनियां वैश्विक संकट का फायदा उठाकर अवैध रूप से मुनाफाखोरी कर रही हैं सरकारी पंपों पर गैस 67 रुपये प्रति लीटर मिल रही है, जबकि ‘गो गैस’ जैसी निजी कंपनियां 120 रुपये प्रति लीटर
की दर से वसूली कर रही हैं।
बेतहाशा बढ़ी कीमतों के कारण रिक्शा चालकों की दैनिक आय का बड़ा हिस्सा केवल ईंधन में ही खर्च हो रहा है। इस मुलाकात के दौरान कॉमरेड डी. एल. कराड, एड. तानाजी जायभावे, तुकाराम सोनजे और संतोष फालके सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
पिछले एक महीने से खाड़ी युद्ध के कारण ईंधन आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शहर में ऑटो एलपीजी की किल्लत का आलम यह है शहर के अधिकांश गैस पंप पिछले 8 दिनों से बंद पड़े थे।
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सोमवार को जैसे ही कुछ चुनिंदा पंपों पर गैस उपलब्ध हुई, वहां वाहनों का तांता लग गया। रिक्शा चालकों को एक लीटर गैस के लिए 120 रुपये तक चुकाने पड़े और घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी सीमित मात्रा में ही ईंधन मिल पा रहा है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति अब कुछ हद तक नियंत्रण में है, लेकिन ऑटो एलपीजी का संकट जस का तस बना हुआ है।