

Nashik Talathi Revenue News : नासिक जिले की 15 तहसीलों के करीब 800 तलाठी और ग्राम राजस्व अधिकारी सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
इगतपुरी और त्र्यंबकेश्वर के प्रांत अधिकारी पवन दत्ता की कथित कार्यशैली, निलंबन और फेरबदल की कार्रवाई के विरोध में यह आंदोलन शुरू किया गया है। हड़ताल से कई महत्वपूर्ण राजस्व सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
गणेशोत्सव के बीच नासिक के प्रशासनिक महकमे में बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है। जिले की 15 तहसीलों के करीब 800 तलाठी और ग्राम राजस्व अधिकारी काम बंद कर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि इगतपुरी और त्र्यंबकेश्वर के प्रांत अधिकारी की कार्यशैली और कथित दंडात्मक कार्रवाई के कारण यह कदम उठाना पड़ा।
नासिक जिले में राजस्व विभाग के कामकाज पर तलाठी और मंडल अधिकारियों की हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है। इगतपुरी और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र के प्रांत अधिकारी पवन दत्ता के कथित मनमाने कामकाज, कर्मचारियों के निलंबन और जबरन फेरबदल के विरोध में जिलेभर के तलाठी और ग्राम राजस्व अधिकारी एकजुट हुए हैं।
सोमवार से जिले के सभी 15 तालुकों से करीब 800 तलाठी नासिकजिलाधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर पहले ज्ञापन दिया गया था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद काम बंद करने का निर्णय लिया गया।
आंदोलनकारी तलाठी महासंघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि इगतपुरी और त्र्यंबकेश्वर के प्रांत अधिकारी नियमों की अनदेखी कर मातहत कर्मचारियों के खिलाफ एकतरफा और दंडात्मक कार्रवाई कर रहे हैं। उनका दावा है कि ग्राम राजस्व अधिकारियों और मंडल अधिकारियों को उचित कारण या प्रक्रिया के बिना निलंबित किया जा रहा है तथा मनमाने तरीके से उनका फेरबदल किया जा रहा है।
नासिक जिले तलाठी संघ का कहना है कि अपने सहयोगियों के कथित उत्पीड़न को देखते हुए जिले के कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से काम बंद किया है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक निलंबित अधिकारियों की ससम्मान बहाली और संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
करीब 800 कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई हैं। छात्रों और नागरिकों के लिए जरूरी जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, नॉन-क्रीमीलेयर और डोमिसाइल जैसे दस्तावेजों से संबंधित काम अटकने की स्थिति में हैं।
किसानों से जुड़े दैनिक राजस्व कार्यों पर भी इसका असर पड़ रहा है। 7/12 उतारा, फेरफार प्रविष्टियां, नामांतरण और फसल बीमा से संबंधित काम प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
आंदोलन लंबा खिंचने पर ग्रामीण नागरिकों और किसानों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। तलाठी संघ ने अपनी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया है। अब प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजर है।