स्कूल ठीक करो के बाद अभिजीत दीपके ने शुरू किया आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान

Abhijeet Dipke CJP: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने नागपुर में आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान की घोषणा की है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों की दुर्दशा और सुविधाओं की जांच की जाएगी।
After Fix the Schools, Abhijit Dipke has launched the Fix Tribal Schools campaign.
अभिजीत दीपके(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Cockroach Janta Party Education Campaign Nagpur: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और प्रमुख अभिजीत दीपके ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान की सफलता के बाद एक नए राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान किया है। महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीपके ने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पार्टी की टीमें अब देश के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में जाकर वहां के सरकारी स्कूलों और आश्रम शालाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगी।

80 सालों में नहीं हुआ आदिवासी स्कूलों का विकास

अभिजीत दीपके ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश को आजाद हुए 80 साल होने वाले हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों के स्कूलों में कोई ठोस विकास नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक राजनीतिक दल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता; आजादी के बाद से शासन करने वाली सभी सरकारें आदिवासियों की उपेक्षा और इन स्कूलों की दुर्दशा के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। गौरतलब है कि गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है।

नीट आंदोलन से पहचान बनाने वाली CJP का नया कदम

NEET पेपर लीक के विरोध में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने वाली CJP ने सबसे पहले 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया था। इसके तहत महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के स्कूलों की जमीनी हकीकत उजागर की गई थी। हाल ही में CJP की टीमों ने कर्नाटक, झारखंड और पंजाब के सरकारी स्कूलों का भी दौरा किया था।

After Fix the Schools, Abhijit Dipke has launched the Fix Tribal Schools campaign.
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मध्य प्रदेश में बच्चों की मौतों पर उठाए सवाल

हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों का दौरा कर लौटे दीपके ने वहां बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक आदिवासी बच्चों की जान गई है। दीपके ने सवाल किया कि यदि ये मौतें मुंबई या किसी बड़े मेट्रो शहर में हुई होतीं, तो पूरे देश में हंगामा मच जाता, लेकिन आदिवासी बच्चों की जिंदगी को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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