(प्रतीकात्मक तस्वीर)
CID Investigation Update Maharashtra: राज्य के बहुचर्चित 400 करोड़ रुपये की नकदी लूट और अपहरण मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है।
इस मामले की जांच नाशिक ग्रामीण पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) से वापस लेकर अब राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, 23 फरवरी को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं। इससे पहले एसआईटी ने इस पूरे मामले को ‘फर्जी’ बताते हुए इसे बंद करने की रिपोर्ट अदालत में पेश की थी। हालांकि, राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा की गई आंतरिक समीक्षा में एसआईटी की जांच पर गंभीर तकनीकी और प्रक्रियात्मक आपत्तियां जताई गईं।
नाशिक ग्रामीण पुलिस की एसआईटी ने महज 25 दिनों में जांच पूरी कर 12 फरवरी को इगतपुरी कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की थी। इतनी बड़ी राशि से जुड़े मामले की जांच इतनी जल्दी पूरी करने और गिरफ्तार 8 आरोपियों को छोड़ने पर वरिष्ठ स्तर पर संदेह जताया गया।
नाशिक के एक व्यवसायी ने घोटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि कर्नाटक से गुजरात के एक आश्रम ले जाए जा रहे 400 करोड़ रुपये (बंद हो चुके 2000 के नोट) कर्नाटक के चोरला घाट इलाके में लूट लिए गए और संबंधित व्यक्तियों का अपहरण कर लिया गया। इस मामले में बिल्डर किशोर सावला, हवाला ऑपरेटर विराट गांधी और एक रेलवे पुलिस अधिकारी सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
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विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने पुष्टि की है कि जांच की त्रुटियों की रिपोर्ट महानिरीक्षक को भेजी गई थी, जिसके बाद जांच सीआईडी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई। पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने नाशिक ग्रामीण पुलिस अधीक्षक को मामले से संबंधित सभी मूल दस्तावेज, सबूत और केस डायरी तत्काल सीआईडी को सौंपने का आदेश दिया है। हालांकि, एसआईटी प्रमुख आदित्य मिरखेलकर ने दावा किया है कि उनकी जांच पूरी तरह पारदर्शी थी।