84 उम्मीदवारों को नियुक्ति से पहले झटका, MPSC ने ऐन वक्त पर रोकी दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया

MPSC Recruitment 2026: MPSC गट-ब परीक्षा में चयनित 84 दुय्यम निबंधक व मुद्रांक निरीक्षक उम्मीदवारों का दस्तावेज सत्यापन ऐन वक्त पर स्थगित, भर्ती में अनियमितता के आरोपों से विवाद बढ़ा।
MPSC 84 Selected Candidates Document Verification Postponed
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MPSC Recruitment 2026: महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा में दिन-रात मेहनत कर दुय्यम निबंधक (श्रेणी-1) तथा मुद्रांक निरीक्षक पद के लिए चयनित 84 उम्मीदवारों को नियुक्ति से ठीक पहले बड़ा झटका लगा है।

पुणे स्थित नोंदणी महानिरीक्षक कार्यालय में 22 और 23 सितंबर को होने वाली दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया ऐन वक्त पर स्थगित कर दी गई। उम्मीदवारों को मोबाइल पर संदेश भेजकर प्रक्रिया अगले आदेश तक रोकने की जानकारी दी गई। अचानक लिए गए इस निर्णय से चयनित उम्मीदवारों में नाराजगी और असमंजस का माहौल है।

महाराष्ट्र गट-ब (अराजपत्रित) संयुक्त मुख्य परीक्षा का परिणाम अगस्त में घोषित किया गया था।आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच दिन-रात पढ़ाई कर इन उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की थी। चयन के बाद शैक्षणिक प्रमाणपत्र, जाति वैधता प्रमाणपत्र समेत अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की तैयारी भी पूरी हो चुकी थी।

क्या है उम्मीदवारों का कहना?

उम्मीदवारों का कहना है कि नियुक्ति की अंतिम प्रक्रिया तक पहुंचने के बाद अचानक दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति रोक दिए जाने से उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक स्तर पर इस भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया कि एक ही परीक्षा हॉल से 12 उम्मीदवार दुय्यम निबंधक पद के लिए चयनित हुए हैं और इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई हो सकती है।

औषध निरीक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सामने आने के बाद एमपीएससी की अन्य भर्तियों को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए गए हैं। राकांपा (शरद गुट) के नेता रोहित पवार और उनके पदाधिकारियों ने भी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक ही हॉल से 12 उम्मीदवारों के चयन का मुद्दा उठाया।

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ठोस प्रमाण हैं तो जांच की जानी चाहिए

चयनित उम्मीदवारों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के ठोस प्रमाण हैं तो उसकी जांच की जानी चाहिए, लेकिन केवल राजनीतिक आरोपों और सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया रोकना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा में सफलता हासिल की है।

84 चयनित उम्मीदवार अब दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच की जाए, लेकिन दोष सिद्ध होने से पहले सभी सफल उम्मीदवारों को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं होगा।

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उम्मीदवारों ने आरोपों पर रखे ये तथ्य

पहला तथ्य: 12 उम्मीदवार एक ही हॉल में नहीं बैठे थे। इनमें से 9 उम्मीदवार ब्लॉक ई-14 में, जबकि 3 उम्मीदवार ब्लॉक ई-15 में बैठे थे।

दूसरा तथ्य: 12 में से सभी उम्मीदवारों का अंतिम चयन नहीं हुआ है। उम्मीदवारों के अनुसार केवल 6 का चयन हुआ है। इनमें 4 दुय्यम निबंधक और 2 राज्य कर निरीक्षक पद पर चयनित हुए हैं।

तीसरा तथ्यः चयनित उम्मीदवारों की मेरिट रैंक भी एक-दूसरे से काफी अलग है। संबंधित उम्मीदवारों की रैंक 4, 39, 59, 140, 963 और 1932 बताई गई है। उम्मीदवारों का तर्क है कि यदि एक साथ नकल या किसी अन्य अनुचित साधन का इस्तेमाल हुआ होता तो अंकों और रैंक में इस तरह का बड़ा अंतर नहीं दिखाई देता।

चौथा तथ्यः पुणे परीक्षा केंद्र से संबंधित रोल नंबर 38 से शुरू होने वाले उम्मीदवारों का परिणाम में 67 प्रतिशत होने पर भी सवाल उठाया गया। उम्मीदवारों के अनुसार पिछले गट-ब परीक्षाओं के परिणामों में पुणे केंद्र के उम्मीदवारों का अनुपात इससे अधिक करीब 78 प्रतिशत तक रहा है।

उनका कहना है कि बड़ी संख्या में मुख्य परीक्षा के उम्मीदवार पुणे से परीक्षा देते हैं, इसलिए केवल केंद्र के आधार पर संदेह करना उचित नहीं है।

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