भंडारा मेडिकल कॉलेज में खुले में पड़ा मिला बायोमेडिकल कचरा, मरीजों और कर्मचारियों पर संक्रमण का खतरा

Biomedical Waste: भंडारा के सरकारी मेडिकल कॉलेज परिसर में दवाइयां, मास्क, पट्टियां और अन्य बायोमेडिकल कचरा खुले में पड़ा मिला। इससे संक्रमण और जनस्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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बायोमेडिकल कचरा (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Medical College: भंडारा नगर परिषद प्रशासन द्वारा हाल ही में शहर में खुले में कचरा फेंकने और जलाने वाले अस्पतालों तथा पैथोलॉजी केंद्रों पर जुर्माना लगाया गया है। इसके बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज भंडारा परिसर में जैव चिकित्सकीय कचरे के खुले में पड़े होने का मामला सामने आया है। परिसर में दवाइयां, मास्क, पट्टियां और अन्य जैविक रूप से संक्रामक सामग्री खुले में पड़ी दिखाई दी, खुले में पड़ा कचरा कुत्तों द्वारा इधर-उधर फैलाया जा रहा है। इससे परिसर में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

जैव चिकित्सकीय कचरे में इस्तेमाल की गई पट्टियां, मास्क और अन्य सामग्री होने के कारण इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे कचरे का नियमानुसार सुरक्षित तरीके से संग्रहण और निपटारा किया जान आवश्यक है। एक ओर नगर परिषद प्रशासन खुले में कचरा फेंकने और जलाने वाल निजी अस्पतालों तथा पैथोलॉजी केंद्रों प कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी अ सरकारी मेडिकल कॉलेज परिसर में ही जा चिकित्सकीय कचरा खुले में पड़ा मिल प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थान के परिसर में ही इस प्रकार की लापरवाही होना गंभीर विषय है।

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संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा पवन भोले

सामाजिक कार्यकर्ता पवन भोले ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे के निपटान में गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में एकल उपयोग वाले उपकरण निकलते हैं। इनके संपर्क में आने से वायरस संक्रमण, एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है।

स्वास्थ्य कर्मचारियों ने इस मामले की ओर ध्यान आकर्षित किया, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। खुले में पड़ा यह कचरा लोगों के स्वास्थ्य के साथ जल, भूमि और वायु के लिए भी खतरा है।

जनस्वास्थ्य पर खतरा : निंबार्ते

भाजपा नेता महेंद्र निंबार्ते ने कहा कि बायोमेडिकल कचरे का उचित निपटान नहीं होने से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सिरिंज, सुई, पट्टियां और दवा की बोतलें खुले में या सामान्य कचरे के साथ फेंकी जा रही हैं।

इससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। नियमों के अनुसार बायोमेडिकल कचरे का अलग-अलग वर्गीकरण कर सुरक्षित तरीके से निपटान किया जाना चाहिए। सरकारी मेडिकल कॉलेज द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। प्रशासन को ऐसे मामलों की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

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