कुंभमेले के लिए रिंग रोड, जमीन की गिनती शुरू, देवलाली सहित कई गांवों में किसानों का विरोध
Nashik Farmers Protest: सिंहस्थ कुंभमेले को ध्यान में रखते हुए नाशिक में बाहरी रिंग रोड के लिए भूमि पैमाइश शुरू हो गई है, लेकिन देवलाली सहित कई गांवों में किसानों के विरोध कायम है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Kumbh Mela ring road (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Land Survey: सिंहस्थ कुंभमेले के मद्देनजर बाहरी रिंग रोड के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने बुधवार, 28 जनवरी से भूमि पैमाइश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, देवलाली सहित कुछ गांवों में किसानों ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण कानून के बजाय ‘सीधी खरीद’ के माध्यम से जमीन लेने को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत किसानों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने का प्रस्ताव है।
7 हजार करोड़ का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
कुंभमेले के दौरान यातायात के दबाव को कम करने और क्षेत्र की कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने 66 किलोमीटर लंबे बाहरी रिंग रोड की योजना बनाई है। इस परियोजना के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह रिंग रोड नाशिक, दिंडोरी और त्र्यंबकेश्वर तहसील के करीब 18 गांवों से होकर गुजरेगी।
विरोध और संवाद की स्थिति
बुधवार सुबह आडगांव, विहीतगांव, पाथर्डी, पिंपलगांव खांब, विल्होळी और देवलाली क्षेत्रों में एक साथ भूमि पैमाइश का कार्य शुरू किया गया। कई स्थानों पर किसानों ने अपनी पैतृक जमीन देने से इनकार करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को संभालने के लिए उपविभागीय अधिकारी किसानों से संवाद कर रहे हैं और उन्हें विकास परियोजना का महत्व तथा मुआवजे के मानदंडों की जानकारी दे रहे हैं।
सम्बंधित ख़बरें
नासिक: Dwarka Chowk Traffic Jam से मिलेगी मुक्ति, अगले 15 से 20 दिनों में खुलेंगे सभी सर्विस रोड
उद्धव ठाकरे की पार्टी छोड़ने के लिए मिला 150 करोड़ का ऑफर, MP राजाभाऊ के पिता प्रकाश वाजे का सनसनीखेज खुलासा
Nashik Kumbh Mela सामाजिक एकता का सशक्त माध्यम है, अतुल लिमये ने जनसहभागिता पर की बैठक
नासिक में लैब रिपोर्ट की सुस्ती से मिलावटखोर बेखौफ; 350 में से 270 सैंपलों की जांच महीनों से अटकी
ये भी पढ़े: “एक युग का अंत” अजितदादा पवार पर विधायक सतीश चव्हाण का बड़ा बयान, राजनीति में शोक
प्रशासन की रणनीति
जिला प्रशासन के अनुसार, भूमि अधिग्रहण कानून के तहत प्रक्रिया पूरी करने में 100 से 125 दिनों का समय लगता है, जो काफी लंबी और जटिल प्रक्रिया है। इसी कारण प्रशासन ‘सीधी खरीद’ की नीति पर जोर दे रहा है।
अधिकारी नियुक्त
प्रत्येक गांव के लिए भूमि अभिलेख विभाग का एक अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनकी सहायता के लिए तलाठी, मंडल अधिकारी और ग्रामसेवक तैनात किए गए हैं।
समय सीमा
प्रशासन ने 10 फरवरी तक भूमि पैमाइश का कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। देवलाली में हुए विरोध के संदर्भ में अधिकारियों ने बताया कि अगले दो दिनों में संबंधित किसानों के साथ चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
