

Nashik Kumbh Fake Work Order Scam Girish Mahajan: सिंहस्थ कुंभ मेले के नाम पर 591 करोड़ रुपए की कथित फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर ठेकेदारों से करोड़ों रुपए की वसूली के मामले ने महाराष्ट्र की सियासत गरमा दी है। मामले में कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन के दूर के रिश्तेदार तनय महाजन समेत 3 लोगों की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष ने सरकार और महाजन पर सवालों की बौछार कर दी है। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच् चस्तरीय जांच की मांग करते हुए पूछा है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जी दस्तावेज और वर्क ऑर्डर तैयार होने के बावजूद सरकारी तंत्र को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि कुंभ मेला श्रद्धा का आयोजन है या सत्ताधारियों की कमाई का जरिया? उन्होंने कहा कि 591 करोड़ रुपए की फर्जी वर्क ऑर्डर का मामला केवल आर्थिक अनियमितता का विषय नहीं है, बल्कि इससे सरकारी व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
गायकवाड़ ने कहा कि मंत्री की ओर से महाजन का रिश्तेदार अरेस्ट मामले में तनय अनंत महाजन, नरेंद्र तोताराम महाजन और शकील अहमद सलीमउद्दीन शेख को गिरफ्तार किया गया है। इनमें तनय महाजन को मंत्री गिरीश महाजन का दूर का रिश्तेदार बताया जा रहा है। इसी तथ्य को लेकर विपक्ष ने मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाए है।
रिश्तेदार से दूरी बनाने की बात कही जा रही है लेकिन असली सवाल यह है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वर्क ऑर्डर जारी होने तक संबंधित विभाग और अधिकारी क्या कर रहे थे। उन्होंने मांग की कि इस मामले में रकम के लेन-देन से लेकर कथित राजनीतिक संरक्षण तक हर पहलू की जांच होनी चाहिए।
हालांकि गिरीश महाजन ने मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उनका कहना है कि आरोपी उनका दूर का रिश्तेदार है लेकिन इस आधार पर किसी को भी बचाया नहीं जाएगा। मामला सामने आते ही उन्होंने मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा था। महाजन ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों के परिवार से उनके कोई पारिवारिक संबंध नहीं हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने भी सरकार को घेरते हुए पूछा कि जब सैकड़ों करोड़ रुपए की वर्क ऑर्डर तैयार किए जा रहे थे तब प्रशासन कहां था? यदि आरोपियों ने कुंभ मेला प्राधिकरण के फर्जी दस्तावेज, विभागीय आयुक्त की कथित फर्जी डिजिटल सिग्नेचर और राजमुद्रा का इस्तेमाल किया तो इन दस्तावेजों की जांच करने वाली सरकारी व्यवस्था ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? वडेट्टीवार ने मामले में राजनीतिक संरक्षण की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित न रहे, पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों तक पहुंचनी चाहिए।