किनगांव पथराव मामला: 16 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए, एपीसीआर और एकता संगठन ने सुरक्षा की मांग की

Kingaon Violence Case: जलगांव जिले के यावल तहसील के किनगांव पथराव मामले में पुलिस कस्टडी समाप्त होने के बाद अदालत ने 16 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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किनगांव पथराव मामला(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • किनगांव पथराव मामले में गिरफ्तार 16 आरोपियों की पुलिस कस्टडी समाप्त होने के बाद यावल अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

  • यावल पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 390/2026 के तहत विभिन्न धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

  • सुनवाई के दौरान परिजनों ने जन्म प्रमाण पत्र पेश कर एक आरोपी के नाबालिग होने का दावा किया।

Kingaon Stone Pelting Case: किनगांव (यावल) में प्रार्थना स्थल के सामने आंदोलन के दौरान हुए पथराव के मामले में यावल पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 390/2026 दर्ज की गई है। विभिन्न धाराओं के साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत लगभग 60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से गिरफ्तार किए गए 16 लोगों को पुलिस कस्टडी की अवधि समाप्त होने के बाद यावल अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी 16 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

आरोपियों में एक के नाबालिग होने का दावा

इस सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा सामने आया। उपस्थित 16 आरोपियों में से एक व्यक्ति के परिजनों ने जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर उसके नाबालिग होने का दावा किया। अदालत ने इन दस्तावेजों की जांच की। अभियोजन पक्ष के तर्कों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद, संबंधित किशोर को वयस्क आरोपियों की तरह न्यायिक प्रक्रिया में रखने के बजाय बाल न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए।

इस घटना के बाद, नाबालिग व्यक्ति की गिरफ्तारी और 6 दिनों तक पुलिस हिरासत में रखने की प्रक्रिया कानूनी रूप से सही थी या नहीं, इसे लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मांग की जा रही है कि संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।

कानून सभी के लिए समान; बच्चों के लिए विशेष संरक्षण आवश्यक

एपीसीआर और एकता संगठन जलगांव ने इस मामले के आरोपियों को पहले दिन से कानूनी सहायता प्रदान करते हुए पुलिस स्टेशन और अदालती कार्यवाही में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहकर कानूनी लड़ाई जारी रखी है। आरोपियों की ओर से फैजपूर के एड. शेख खालिद, यावल के एड. मोहित शेख, एड. वदूद शेख तथा भुसावल के एड. असरार पिंजारी ने अदालत में पक्ष रखा। एपीसीआर के आरिफ देशमुख तथा एकता संगठन के फारुक शेख, अनिश शाह, दानियल शेख, हाफिज रहीम पटेल और नजमुद्दीन शेख ने किनगांव और यावल में मौके पर उपस्थित रहकर कानूनी सहायता और समन्वय का कार्य जारी रखा है।

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दोषी कौन, यह अदालत तय करेगी; कानूनी अधिकार हर किसी का

इस मामले में पथराव या कानून-व्यवस्था भंग करने के आरोपों की अदालती कार्यवाही स्वतंत्र रूप से जारी रहेगी। हालांकि, केवल आरोप लगने से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, और प्रत्येक आरोपी को कानून के अनुसार बचाव का अवसर मिलना संवैधानिक न्याय प्रणाली का मौलिक हिस्सा है।

विशेष रूप से नाबालिग के मामले में बाल न्याय प्रणाली के सुरक्षात्मक प्रावधानों का सख्ती से पालन होना आवश्यक है। इसलिए एपीसीआर और एकता संगठन ने मांग की है कि इस मामले की पूरी कार्रवाई कानून, संविधान और बाल न्याय प्रणाली के नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए।

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जो ग्रामीण फरार नहीं हैं, वे डरें नहीं: एकता संगठन की अपील

यह जानकारी सामने आ रही है कि पुलिस की कार्रवाई के डर से किनगांव के कुछ युवा, बुजुर्ग और महिलाएं घरों से बाहर चले गए हैं। ऐसे नागरिकों को संबोधित करते हुए एकता संगठन ने शांति बनाए रखने और अपने घर लौटने की अपील की है। एकता संगठन के फारूक शेख ने कहा, कानूनी प्रक्रिया चल रही है। निर्दोष लोगों को डरकर गांव छोड़ने की जरूरत नहीं है। अगर किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होता है, तो उसे कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।

हालांकि, नागरिक कानून अपने हाथ में न लें और शांति बनाए रखें। चाहे पथराव हो या पुलिस की कार्रवाई दोनों की सत्यता की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। आरोपी दोषी हैं या निर्दोष, इसका अंतिम फैसला अदालत करेगी; लेकिन हर नागरिक के संवैधानिक और कानूनी अधिकार बरकरार रहने चाहिए, यही रुख एपीसीआर और एकता संगठन ने अपनाया है।