नियोजन समिति सभा में हुआ हाई वॉल्टेज ड्रामा, सत्ताधारी MLA और पालकमंत्री एक दूसरे से भिड़े

जलगांव जिला नियोजन समिति की मीटिंग के दौरान पालकमंत्री गुलाबराव पाटिल और सत्ता पक्ष के विधायकों के भिड़ने की खबर सामने आ रही है। निधि वितरण को लेकर इन दोनों पक्षों में जमकर विवाद हुआ।
Gulabrao Patil
गुलाबराव पाटिल (फाइल फोटो)
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Nashik News In Hindi: जलगांव जिला नियोजन समिति की सभा में निधि वितरण को लेकर पालकमंत्री गुलाबराव पाटिल और सत्ताधारी विधायकों के बीच तीखी जंग छिड़ गई, लेकिन बैठक का सबसे सनसनीखेज मोड तब आया जब विधायक मंगेश चव्हाण ने स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस इंस्पेक्टर संदीप भट्ट पाटिल पर एक महिला के यौन शोषण और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया, विधायकों ने पालकमंत्री पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाते हुए किसानों, सड़कों और नालियों के लिए निधि की कमी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।

जवाब में पालकमंत्री ने नियमों के तहत निधि खर्च करने का दावा करते हुए पांच साल के हिसाब की चुनौती दी। पुलिस इंस्पेक्टर पर लगे आरोपों ने सभा को और विवादित बना दिया, जहां सर्वसम्मति से उन्हें पद से हटाने और मामला दर्ज करने का फैसला लिया गया। सत्ताधारी दल के इस आंतरिक टकराव, पुलिस अधिकारी पर आरोप और पत्रकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने सभा को सुर्खियों में ला लिया।

पालकमंत्री गुलाबराव पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस सभा में सांसद स्मिता वाघ, वस्त्रीद्योग मंत्री संजय सावकारे, विधायक मंगेश चव्हाण, सुरेश भोले, अमोल पाटिल, जिला परिषद की सीईओ मीनल करणवाल संहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सभा शुरू होते ही विधायक किशोर पाटिल ने निधि वितरण पर सवाल उठाकर पालकमंत्री की कटघरे में खड़ा किया।

नहीं करेंगे विरोध

उन्होंने कहा, "15 करोड़ रुपये वारकरी भवन, सिटीस्कैन मशीन और नाट्‌यगृह की मरम्मत के लिए दिए जाते हैं। वह भी जिना हमसे सलाह किए, हम इसका विरोध नहीं करेंगे, लेकिन हमें तो पूछा जाए, सड़को, नालियों और किसानों के लिए निधि क्यों नहीं दी जाती? सिटीस्कैन के लिए स्वास्थ्य विभाग का अलम बजट है, फिर उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ?" विधायक मंगेश चव्हाण ने भी निधि वितरण की प्रक्रिया पर सचाल उठाए उन्होंने पूछा, 'किसानों के हित के लिए नियोजन समिति ने क्या किया?

पालकमंत्री गुलाबराव का करारा जवाब

पालकमंत्री गुलाबराव पाटिल ने विधायकों के आरोपों का करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने अपने अधिकारों के तहत ही निधि का नियोजन किया है। मैं पिछले पांच साल के निधि का पूरा हिस्साब देने की तैयार हूं। कोई भी फैसला नियमों के खिलाफ नहीं है।" उनके इस दावे के बावजूद विधायकों का असतीष बरकरार रहा, जिससे सभा का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

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