नासिक में IT कंपनी उत्पीड़न मामले में 29 मई तक दाखिल होगी 8 चार्जशीट; CCTV बंद होने और सीक्रेट कोड के खुलासे
Nashik IT Company Case: नासिक की IT कंपनी में महिला उत्पीड़न और धर्मांतरण प्रयास मामले में SIT 29 मई तक 8 शेष चार्जशीट दाखिल करेगी। जांच में बंद CCTV और सीक्रेट कोड जैसे चौंकाने वाले खुलासे हुए।
- Written By: रूपम सिंह
IT कंपनी उत्पीड़न मामला (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik IT Company Case Sandeep Mitke: बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी में महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़, धार्मिक भावनाएं आहत करने और एक युवक का धर्मांतरण कराने के प्रयास से जुड़े चर्चित मामले में अब कानूनी कार्रवाई ने तेजी पकड़ ली है। इस प्रकरण में दर्ज शेष 8 मामलों की चार्जशीट 29 मई तक नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय में दाखिल किए जाने की संभावना है।
देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज मुख्य मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले ही करीब 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुका है और नासिक रोड अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई भी शुरू हो चुकी है। मामले में आरोपी निदा खान को शरण देने के आरोप में छत्रपति संभाजीनगर के एमआईएम के पूर्व नगरसेवक मतीन पटेल को भी सहआरोपी बनाया गया है। जांच और चार्जशीट से कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
पॉश कमेटी नासिक कार्यालय में नहीं थी मौजूद
कंपनी के नासिक कार्यालय में लगे कुल 27 सीसीटीवी कैमरों में से 18 बंद पाए गए, जबकि केवल 9 कैमरे ही चालू थे। आशंका जताई जा रही है कि सबूत मिटाने या गतिविधियां छिपाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कार्यालय की छत और अन्य खुली जगहों का इस्तेमाल कर महिला
बार छेड़छाड़ की। महिला कर्मचारियों के साथ बार-सुरक्षा के लिए जरूरी पॉश कमेटी नासिक कार्यालय में मौजूद ही नहीं थी।
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समिति के सभी 11 सदस्य पुणे कार्यालय में कार्यरत थे, जिसके कारण पीड़ित महिलाओं को समय पर शिकायत दर्ज कराने का अवसर नहीं मिल पाया। चार्जशीट के अनुसार, कार्यालय में समय-समय पर एक विशेष धर्म की लगभग 3 घंटे तक प्रार्थना कराई जाती थी। जांच एजेंसियों ने आशंका जताई है कि धर्मांतरण एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। आरोपियों ने कुछ कर्मचारियों को सॉफ्ट टार्गेट बनाकर उन पर मानसिक और धार्मिक दबाव बनाया।
पिछले नौ वर्षों से कर्मियों का किया जा रहा था उत्पीड़न
जांच में यह दावा भी किया गया है कि यह पूरा मामला पिछले साढ़े नौ वर्षों से चल रहा था। छेड़छाड़, धमकियों और मानसिक प्रताड़ना के साथ-साथ पीड़ितों पर ब्लैक मैजिक या टोटकों के जरिए दबाव बनाने का प्रयास भी किया गया।
सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके के मार्गदर्शन में जांच अधिकारियों ने तकनीकी, डिजिटल और मौखिक साक्ष्य जुटाए है और शुक्रवार तक शेष सभी 8 चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की जाएंगी। इस कार्रवाई से दानिश शेख, तौसिफ अत्तार, निदा खान, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, आसिफ अंसारी, शफी शेख और अश्विनी चैनानी की मुश्किलें और बढ़ने की संभावना है।
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विशेष धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए किया गया मजबूर
पीड़ित कर्मचारियों के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी और नकारात्मक रिपोर्ट भेजकर उनका मानसिक उत्पीड़न किया जाता था। सहकर्मियों के सामने अपमानित कर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने का प्रयास किया गया। कुछ कर्मचारियों को जबरन एक विशेष धर्म का धार्मिक ग्रंथ पढ़ने और मांसाहार करने के लिए दबाव डाला गया।
विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां भी दी जाती थीं।
महिला कर्मचारियों पर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर उनका मानसिक और लैंगिक उत्पीडन किया जाता था। पीड़ितों पर जानबूझकर अतिरिक्त काम का दबाव बनाया जाता था। आरोपी आपस में संवाद करने और पीड़ितों को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए एक सीक्रेट वर्बल कोड का इस्तेमाल करते थे।
