होटल हयात पर चला पीला पंजा, बजरंग दल के विरोध के बाद मनपा की बड़ी कार्रवाई, अतिक्रमण ध्वस्त
Beef Controversy Nashik: नासिक के सातपुर इलाके में होटल हयात पर कथित गोमांस मामले के बाद मनपा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध अतिक्रमण ध्वस्त कर दिया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
- Written By: आंचल लोखंडे
Beef Controversy Nashik (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Encroachment Demolition: नासिक शहर के सातपुर इलाके में स्थित होटल हयात में कथित रूप से गोमांस की बिक्री और भंडारण का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया। बजरंग दल और विभिन्न हिंदू संगठनों द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
सोमवार सुबह महापौर के आदेश पर सातपुर नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने त्र्यंबक रोड स्थित होटल हयात सहित वन विभाग की भूमि पर पिछले लगभग 30 वर्षों से किए गए अवैध निर्माणों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
त्र्यंबक रोड पर संतोषी माता मंदिर के सामने कथित रूप से हो रही गोमांस बिक्री को लेकर स्थानीय नागरिकों में गहरा रोष है। लोगों का आरोप है कि पुलिस और मनपा प्रशासन इस ओर से आंखें मूंदे हुए थे। रविवार रात बजरंग दल के पदाधिकारियों को सूचना मिली थी कि होटल हयात दरबार के फ्रीजर में लगभग 500 किलो गोमांस रखा है। जब भीड़ ने अवैध कत्लखाने को ध्वस्त करने की मांग की, तो स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
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भारी सुरक्षा के बीच हुई कार्रवाई
सोमवार सुबह महापौर हिमगौरी आडके और अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त की मौजूदगी में भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि कुछ टपरीधारकों और व्यवसायियों ने कार्रवाई का विरोध किया और इलाके में कुछ समय के लिए तनाव बना रहा, लेकिन पुलिस और निगम कर्मियों ने कानूनी कार्रवाई जारी रखी। कई नागरिकों ने प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया।
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गोमांस बिक्री के बाद भड़का आक्रोश
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. वृषाली नरेश सोनवणे ने कहा कि होटल हयात दरबार के भीतर और बाहर जिस तरह कथित रूप से गोमांस की बिक्री हो रही थी, वह असहनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है और दोषी होटलों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
जैसी करनी वैसी भरनी
इलाके में चर्चा है कि होटल हयात और अन्य दुकानों को वन विभाग पहले भी नोटिस दे चुका था। आरोप है कि उस समय होटल मालिक ने वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एसीबी कार्रवाई करवाई थी। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
