नासिक में 4,000 करोड़ के टेंडर पर सियासी घमासान; सुहास कांदे के आरोपों पर समीर भुजबल का पलटवार, सभी आरोप खारिज
Nashik Food Supply Tender: नासिक में 4 हजार करोड़ की निविदा प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। विधायक सुहास कांदे के आरोपों के बाद समीर भुजबल ने सभी भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
समीर भुजबल,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik Tender Corruption Allegations: नासिक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की 4 हजार करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। विधायक सुहास कांदे के विधानसभा में किए गए प्रदर्शन के बाद अब समीर भुजबल ने मोर्चा संभालते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
‘निविदा से मेरा कोई लेना-देना नहीं’
समीर भुजबल ने स्पष्ट किया कि निविदा प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं है और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने अपने बचाव में निम्नलिखित बातें कहीं न्यायालय में विचाराधीन यह मामला वर्तमान में न्यायालय के समक्ष है। निविदा प्रक्रिया को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ाया गया था।
निविदा को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की गई हैं। विभाग न्यायालय के अंतिम निर्णय का सम्मान करेगा और उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई तय करेगा। समीर भुजबल ने कहा कि ये आरोप बिना किसी तथ्य या अध्ययन के लगाए गए हैं। यह केवल राजनीतिक द्वेष और हताशा से प्रेरित एक साजिश है, जिसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।
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कांदे बनाम भुजबल वर्चस्व की लड़ाई
गौरतलब है कि विधायक सुहास कांदे ने इस निविदा प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने और एसआईटी से जांच कराने की मांग की थी। कांदे का आरोप है कि निविदा में नियमों को ताक पर रखकर कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाने का खेल खेला गया है।
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इस प्रकरण में उन्होंने सीधे तौर पर समीर भुजबल की भूमिका की जांच की मांग की थी। विधायक कांदे के आरोपों और समीर भुजबल के पलटवार ने महायुति के भीतर चल रहे अंतर्विरोध को फिर से सतह पर ला दिया है। नांदगांव और येवला विधानसभा क्षेत्रों के बीच चली आ रही यह सियासी रस्साकशी अब मुंबई के गलियारों तक पहुंच गई है।
