

Jalgaon Municipal Corporation Rent Dispute: जलगांव महानगरपालिका की आर्थिक रीढ़ माना जाने वाला शॉपिंग किराया नवीनीकरण का मुद्दा अब प्रशासनिक सुस्ती से निकलकर राजनीतिक साख की लड़ाई बन गया है। शहर के 23 व्यापारिक संकुलों की 2606 दुकानों का लीज एग्रीमेंट पिछले 15 वर्षों से लंबित है, जिसके कारण मनपा की करीब 139 करोड़ रुपये की भारी-भरकम वसूली अटकी पड़ी है। विडंबना यह है कि जिले में दिग्गजों की फौज होने के बाद भी समाधान का रास्ता नहीं निकल पा रहा है।
जलगांव जिला वर्तमान में सत्ता के शिखर पर है। जिले से केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, जबकि राज्य सरकार में पालकमंत्री गुलाबराव पाटिल, जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन और मंत्री संजय सावकारे जैसे कद्दावर चेहरे शामिल हैं। भाजपा, शिंदे और अजित पवार गुट की 'महायुति' सरकार होने के बावजूद फरवरी 2026 में भेजा गया नया प्रस्ताव शासन स्तर पर मंजूरी का इंतजार कर रहा है। जनता और व्यापारियों के बीच अब यह चर्चा आम है कि जब सत्ता के सभी सूत्र जिले के पास हैं, तो फाइल किसके इशारे पर अटकी है?
विवाद की मुख्य जड़ 'रेडीरेकनर' दर पर आधारित किराये का प्रतिशत है। सरकारी समिति ने फुले मार्केट के लिए 5% और अन्य संकुलों के लिए 4% दर तय करने की सिफारिश की है। व्यापारी संगठन इसे बहुत अधिक बता रहे हैं और 2% से 3% दर रखने पर अड़े हैं।मनपा प्रशासन का मानना है कि यदि व्यापारियों के दबाव में दरें कम की गईं, तो शहर के खजाने को 168 से 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त घाटा होगा, जिससे आगामी विकास कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं।
हैरानी की बात यह है कि इन दुकानों का मूल करार वर्ष 2011 में ही समाप्त हो चुका है। पिछले 15 वर्षों से न तो दुकानों का स्वामित्व स्पष्ट है और न ही किराया वसूली का ढांचा। मामला अब तकनीकी कम और 'वोट बैंक' की राजनीति का शिकार अधिक नजर आ रहा है। व्यापारी वर्ग शहर की राजनीति में दखल रखता है, शायद यही वजह है कि चुनावी साल में कोई भी मंत्री कड़ा रुख अपनाने से बच रहा है।
जलगांव के बुनियादी ढांचे की हालत खराब है, लेकिन आय का सबसे बड़ा जरिया राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ रहा है। मंत्रियों की यह चुप्पी शहर के भविष्य पर भारी पड़ रही है। यदि जल्द ही शासन स्तर पर निर्णय नहीं लिया गया, तो मनपा दिवालियापन की कगार पर पहुँच सकती है। क्या महायुति के ये दिग्गज मंत्री व्यक्तिगत मतभेदों को भुलाकर जलगांव के हित में यह फाइल क्लियर कराएंगे, या 139 करोड़ की यह वसूली फाइलों में ही दफन हो जाएगी?