

Nashik Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले महीने 6 सांसदों के दलबदल के बाद जहां एक तरफ ठाकरे परिवार मुंबई और मुंबई महानगरपालिका को बचाने के लिए 'मातोश्री' पर आपातकालीन बैठकें कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उत्तर महाराष्ट्र के प्रमुख गढ़ नासिक में एक बड़ा सियासी खेल कर दिया है।
नासिक नगर निगम में ठाकरे गुट के 15 निर्वाचित पार्षदों में से 12 पार्षदों के शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में होने की खबर से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। शिंदे सेना के नेताओं का दावा है कि विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए उनका 'ऑपरेशन टाइगर' पूरी रफ्तार से जारी रहेगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाला बदलने की तैयारी कर रहे इन 12 पार्षदों ने हाल ही में शिंदे सेना के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बेहद गुप्त बैठकें की हैं। इस बैठक में न केवल पाला बदलने की शर्तों पर बात हुई, बल्कि पार्टी में आधिकारिक प्रवेश के भव्य समारोह की तारीखों और इन पार्षदों की पहचान को गुप्त रखने की रणनीति पर भी गंभीर चर्चा हुई है।
चर्चा है कि इन पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए शिंदे सरकार द्वारा प्रत्येक वार्ड के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये की विशेष विकास निधि (स्पेशल फंड) देने का ठोस आश्वासन दिया गया है। इसके अलावा, ठाकरे सेना के एक बेहद कद्दावर स्थानीय नेता के भी शिंदे गुट में शामिल होने की खबर है, जिसने नासिक के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
नासिक नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) के कुल 15 पार्षद निर्वाचित हुए थे, जिनमें से अगर 12 पार्षद एक साथ बाहर निकलते हैं, तो यह नासिक में उद्धव ठाकरे के अस्तित्व के लिए अब तक का सबसे घातक प्रहार होगा। शिंदे सेना ने इस बगावत के जरिए नासिक जिले में अपने संगठन विस्तार के आंदोलन को नई गति दे दी है।
इस भारी राजनीतिक उठापटक और आंतरिक दलबदल की चर्चाओं के बीच, स्थानीय स्तर पर पार्टी को जीवित दिखाने की कोशिशें भी जारी हैं। इसी सिलसिले में शिवसेना (यूबीटी) के जिला प्रमुख डी. जी. सूर्यवंशी, महानगर प्रमुख प्रथमेश गीते और नगर निगम समूह के नेता केशव पोरजे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नासिक नगर निगम आयुक्त से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दलबदल की खबरों से इतर शहर की खस्ताहाल सड़कों, जानलेवा गड्ढों और भारी बारिश के कारण हुए जलभराव जैसे नागरिक मुद्दों पर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति में 6 सांसदों के अचानक पाला बदलकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में जाने के बाद उद्धव ठाकरे गुट गहरे संकट में है। इस राजनीतिक नुकसान के बाद बचे हुए विधायकों और मुंबई के नगरसेवकों को टूटने से रोकने के लिए गुरुवार (9 जुलाई) को ही आदित्य ठाकरे ने 'मातोश्री' पर आपातकालीन बैठक बुलाई थी, ताकि बीएमसी के मुद्दों पर आक्रामक होकर कैडर को संभाला जा सके।
लेकिन, ठाकरे परिवार जब तक मुंबई में अपनी रणनीति मजबूत करता, तब तक नासिक में शिंदे सेना ने 'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसका दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नासिक के यह 12 पार्षद आधिकारिक रूप से शिंदे सेना में शामिल होते हैं, तो आगामी महानगरपालिका चुनावों से ठीक पहले ठाकरे गुट के लिए पूरे उत्तर महाराष्ट्र में वापसी करना नामुमकिन हो जाएगा।