Nashik News: पेयजल जलाशय का उपयोग सीप्लेन के लिए न करें, पर्यावरणविदों ने किया विरोध
महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के जलाशयों पर 'सी प्लेन' हवाई सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन पर्यावरणविद इसके खिलाफ एकजुट हो गए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
पेयजल जलाशय का उपयोग सीप्लेन के लिए न करें। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नासिक: महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के जलाशयों पर ‘सी प्लेन’ हवाई सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यह सेवा गंगापुर बांध से शुरू होगी। पर्यटन विशेषज्ञों और टूर ऑपरेटरों ने इसका स्वागत किया है, लेकिन पर्यावरणविद इसके खिलाफ एकजुट हो गए हैं और उन्होंने पेयजल जलाशय पर किसी भी विमान को उतरने की अनुमति नहीं देने की कसम खाई है। इसलिए, इस परियोजना पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं।
पर्यटन निगम ने राज्य में ‘सी प्लेन’ के लिए 8 संभावित रूट चिन्हित किए हैं। इसमें गंगापुर डैम-मुंबई रूट भी शामिल है। सी प्लेन पर्यटकों के लिए सुखद यात्रा होगी और इसके जरिए पर्यटन को गति मिलेगी। विभाग को उम्मीद है कि ऐसा होगा। 2014 में राज्य सरकार सी प्लेन परियोजना में कमियों और खामियों को दूर करके और अधिक व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण रखते हुए एक बार फिर सी प्लेन सेवा को पंख लगाएगी।
50 से 70 हजार यात्रियों को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस सेवा से सालाना 50 से 70 हजार यात्रियों को लाभ मिलेगा और 5 साल में मुनाफा होगा, जिससे राजस्व में वृद्धि होगी। यह एक तस्वीर है कि पर्यटक पर्यटन में नए अनुभवों के लिए पैसे खर्च करते हैं। इसलिए, सरकार की यह परियोजना निश्चित रूप से निराधार और अव्यवहारिक नहीं है। इस परियोजना से निश्चित रूप से गणपति पुल, कोयना, पानशेत बांध जैसे ‘इको-टूरिज्म’ स्थलों को लाभ मिल सकता है।
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गंगापुर बांध जलाशय पर किसी भी विमान को उतरने नहीं देंगे
हालांकि, नासिक-मुंबई की निकटता विमानों के लिए अव्यावहारिक होगी। इसलिए, इस पर प्रतिक्रिया मिलना मुश्किल है। पर्यावरणविदों ने पहले इस परियोजना को पूरी तरह से रद्द करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब भी पर्यावरणविदों ने यह रुख अपनाया है कि वे इस परियोजना का विरोध करेंगे और गंगापुर बांध जलाशय पर किसी भी विमान को उतरने नहीं देंगे।
2014 में क्यों हुआ था विरोध
2014 में मानव विकास उत्थान विकास मंच, नदी प्रदूषण शोधकर्ता राजेश पंडित समेत कई पर्यावरण संगठनों ने ‘सीप्लेन’ का विरोध किया था। गंगापुर बांध से पीने का पानी सप्लाई होता है। इससे हवाई यातायात और पर्यटकों के कारण प्रदूषण की समस्या पैदा होगी। उन्होंने तर्क दिया था कि शोर के कारण यहां आने वाले बड़ी संख्या में पक्षियों की मुक्त आवाजाही प्रभावित होगी। इस संबंध में पर्यटन विभाग नासिक कार्यालय के अधिकारी इस बात से अनभिज्ञ दिखे कि राज्य सरकार सीप्लेन परियोजना की तैयारी कर रही है।
