Dhule Contaminated Water: धुले में दूषित जल का संकट, प्रभाग 15 के नागरिकों की सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी
Dhule Contaminated Water Supply: धुले के प्रभाग 15 में पिछले 2 वर्षों से नलों में गटर का पानी आने से जनता बेहाल है। लोक सेवा समिति ने प्रशासन के खिलाफ कलेक्टर कार्यालय पर आत्मदाह आंदोलन का ऐलान किया।
- Written By: गोरक्ष पोफली
दूषित जल की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Contaminated Drinking Water Issue: धुले शहर के प्रभाग क्रमांक 15 में पिछले दो वर्षों से नागरिक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। कसाबवाड़ा मस्जिद से लेकर सुल्तानिया चौक तक की मुख्य जल पाइपलाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसके परिणामस्वरूप, नलों के माध्यम से घरों तक पहुँचने वाला पेयजल सीधे गटर की गंदगी और दूषित जल (Contaminated Water) के साथ मिश्रित होकर आ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से यही गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे क्षेत्र में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका बेहद घातक असर पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहा है।
अधिकारियों पर बदसलूकी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
‘लोक सेवा समिति’ के संस्थापक अध्यक्ष अब्दुल हफीज अंसारी ने इस पूरे मामले में जलापूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने विभाग के अधिकारी नवनीत सोनवणे पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब नागरिक शिकायत लेकर जाते हैं, तो उनके साथ बदसलूकी और गाली-गलौज की जाती है। इतना ही नहीं, अधिकारियों पर नागरिकों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। समिति का दावा है कि पाइपलाइन मरम्मत के लिए आए सरकारी फंड का सही इस्तेमाल नहीं हुआ है और इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताएं बरती गई हैं।
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कलेक्टर कार्यालय पर ‘सामूहिक आत्मदाह’ का अल्टीमेटम
प्रशासन की निरंतर चुप्पी और अधिकारियों के नकारात्मक रवैये से तंग आकर अब जनता ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। लोक सेवा समिति और सैकड़ों स्थानीय निवासियों ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जल्द ही शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय के सामने सामूहिक आत्मदाह करेंगे। नागरिकों का कहना है कि अब उनके पास अपनी बात मनवाने का यही अंतिम रास्ता बचा है। इस चेतावनी ने जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि आक्रोशित जनता अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं दिख रही है।
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शुद्ध पेयजल की मांग और जवाबदेही तय करने की अपील
निवेदन सौंपते समय बड़ी संख्या में धुले के नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी पीड़ा साझा करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नागरिकों की प्रमुख मांग है कि पुरानी और जर्जर पाइपलाइन को तुरंत बदलकर नई लाइन डाली जाए ताकि शुद्ध पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। साथ ही, उन्होंने भ्रष्ट और बदसलूकी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आत्मदाह जैसी कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस अल्टीमेटम के बाद हरकत में आता है या नहीं।
